अब कैथी लिपि में लिखे जमीन के डॉक्यूमेंट का हो सकेगा ट्रांसलेशन, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का बड़ा फैसला

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राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा

Bihar Revenue Department: कैथी लिपि में लिखे पुराने जमीन के दस्तावेजों को समझना अब आसान होगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 29 ट्रेंड सलाहकारों की सूची जारी की है, जिनकी मदद से कैथी लिपि से देवनागरी में अनुवाद किया जा सकेगा.

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Bihar Revenue Department: कैथी लिपि में लिखे जमीन के पुराने दस्तावेजों का अब आसानी से अनुवाद हो सकेगा. इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 29 ट्रेंड सलाहकारों की सेवा उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है. इसका मकसद आम नागरिकों की परेशानी समाप्त करना है. इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी डीएम पत्र लिखा है.

इस पत्र में उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान जानकारी मिली कि जिलों में कैथी लिपि के दस्तावेजों का अनुवाद करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं. इससे नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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हर सलाहकार को मिली अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी

विभाग की ओर से बताया गया है कि चयन प्रक्रिया में सफल हुए 29 सलाहकार को पांच दिनों का स्पेशल ट्रेनिंग दिया गया है. इस ट्रेनिंग के बाद ये सभी कैथी लिपि में लिखे दस्तावेजों का सही तरीके से अनुवाद करना सीख गए हैं. इन सलाहकारों की सेवाएं अब विभागीय कामों के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर राज्य के सभी जिलों में ली जा सकेंगी. इसके लिए हर सलाहकार को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है.

कितना पैसा लगेगा

ट्रांसलेशन फीस केंद्र सरकार की संस्थाओं के रेट के पर कैथी लिपि से देवनागरी लिपि में अनुवाद के लिए प्रति पृष्ठ 220 रुपये की दर निर्धारित की गयी है. यह राशि सेवा लेने वाले संस्थान या आम नागरिक द्वारा सीधे सलाहकार को ऑनलाइन माध्यम से भुगतान की जायेगी. नगद भुगतान की अनुमति नहीं होगी.

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क्या बोले मंत्री विजय सिन्हा

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि कैथी लिपि में लिखे पुराने भू-अभिलेखों और दस्तावेजों के अनुवाद में वर्षों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशिक्षित कैथी लिपि जानकारों की सूची तैयार की है. अब किसी भी नागरिक को परेशानी नहीं होगी.

यह व्यवस्था राजस्व से जुड़े मामलों के निष्पादन को सरल और पारदर्शी बनायेगी और आम जनता का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत करेगी. सरकार का मकसद है कि जमीन से जुड़े हर मामले में आम लोगों को तय समय पर सेवा मिले.

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