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Jeevika : महिलाओं की जिंदगी में आ रहा है नया सवेरा, 35 लाख जीविका दीदी बनीं आत्मनिर्भर

Updated at : 11 Mar 2025 6:05 AM (IST)
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women reservation in bihar budget| Women will get 33% reservation in State Road Transport Corporation

सांकेतिक तस्वीर

Jeevika : 2006 से अब तक 10.63 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन हुआ है. इससे एक करोड़ 35 लाख से अधिक परिवारों को जोड़ा गया है. अब तक जीविका दीदियों के 10.36 लाख स्वयं सहायता समूहों के बचत खाते खोले गये हैं.

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Jeevika : पटना. जीविका बिहार में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बन चुकी है. जीविका परियोजना से जुड़कर आज लाखों ग्रामीण महिलाएं गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकाल रही हैं. बिहार में सर्वाधिक कृषि से जुड़े स्वरोजगार से 35 लाख 89 हजार जीविका दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. कृषि विभाग से समन्वय कर अबतक 515 कस्टम हायरिंग केंद्र संचालित किये जा रहे हैं. कृषि क्षेत्र में पांच हजार 178 कृषि उद्यम की स्थापना की गयी है.

1.42 लाख परिवार दुग्ध उत्पादन से जुड़े

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सहयोग से समेकित मुर्गी विकास के अलावा समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना के तहत 8.09 लाख परिवारों को मुर्गीपालन एवं बकरीपालन से जोड़ा गया है. 1.42 लाख परिवार दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं. करीब एक हजार जीविका दीदियां मत्स्यपालन से जुड़ी हैं. अब तक 5,987 पशु सखियों को प्रशिक्षित किया गया है, जो बकरीपालन करने वाली 5.97 लाख परिवारों को सेवा प्रदान कर रही हैं.

महिला उद्यमिता का बढ़ रहा दायरा

अररिया में सीमांचल बकरी उत्पादक कंपनी स्थापित की गयी है. इससे अब तक 19 हजार 956 परिवारों को जोड़ा गया है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की सहायता से कोसी प्रमंडल में स्थापित कौशिकी दुग्ध उत्पादक कंपनी के अंतर्गत अबतक 829 दुग्ध संग्रहण केंद्र खोले गये हैं. अब तक 26,280 पशुपालक दूध की बिक्री इन दुग्ध संग्रहण केंद्रों में कर रहे हैं एवं प्रतिदिन औसतन 70 हजार लीटर दूध का संग्रहण इन केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है. मधुमक्खी पालन कार्य के लिए अबतक 490 उत्पादक समूहों का गठन किया गया है. आइआइएम कोलकाता के सहयोग से महिला उद्यमिता के क्षेत्र में अबतक 150 दीदियों का उद्यम विकास किया गया है.

खोले गये 10.36 लाख स्वयं सहायता समूहों के बचत खाते

2006 से अब तक 10.63 लाख स्वयं सहायता समूहों का गठन हुआ है. इससे एक करोड़ 35 लाख से अधिक परिवारों को जोड़ा गया है. अब तक जीविका दीदियों के 10.36 लाख स्वयं सहायता समूहों के बचत खाते खोले गये हैं. विभिन्न बैंकों द्वारा 48 हजार 516 करोड़ रुपये की राशि ऋण के रूप में स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करायी गयी है.

केस- 1

कटिहार जिले के कुर्सेला प्रखंड के दक्षिणी मुरादपुर पंचायत निवासी लवंग कुमारी पशुसखी बनकर सेवाएं दे रहीं हैं. इस स्वरोजगार से वह महीने के दो से तीन हजार रुपए कमाती हैं. लवंग अपने क्षेत्र के बकरी पालकों को कई जरूरी सेवाएं दे रहीं हैं. इतना ही नहीं पिछले वर्ष बरसात के पहले 840 बकरियों को ईटी और टीटी के टीके लगाकर बकरियों के मृत्यु दर में कमी लाने का काम भी कर चुकी हैं.

केस – 2

कटिहार जिले की अहमदाबाद प्रखंड के दक्षिणी अहमदाबाद पंचायत की दीपा कुमारी ने जीविका से जुड़ने के बाद खुद को आत्मनिर्भर बनाया.जीविका स्वंय सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने 20 हजार रुपये का लोन लेकर अपनी किराना की दुकान खोली थी. समूह से दुबारा 50 हजार रुपये का लोन लेकर दुकान का विस्तार किया. इससे उन्हें अब प्रति माह 15 हजार रुपये की आय होती है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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