तीन वर्षों से जू में रुका है एप्रोच लाइट लगाने का काम, कोहरे में पटना एयरपोर्ट पर लैंडिंग में हो रही परेशानी

पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति नहीं मिलने से तीन साल में भी पटना जू के अंदर 360 मीटर एप्रोच लाइट नहीं लग पायी है. इसके कारण घने कोहरे में पटना एयरपोर्ट पर हर दिन बड़ी संख्या में विमान देर से परिचालित हो रहे हैं.
संवााददाता, पटना : वर्ष 2020-21 में पटना एयरपोर्ट पर 720 मीटर एप्रोच लाइट लगाने का निर्णय हुआ था. इसमें 360 मीटर एप्रोच लाइट रनवे से पटेल गोलंबर के पास पीर अली पथ के कोने तक और 360 मीटर एप्रोच लाइट पटना जू के अंदर लगनी थी. इनके लग जाने से यहां लगा इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आइएलएस कैट वन) इतना सक्षम हो जाता कि वर्तमान 1000 मीटर से 200 मीटर कम दृश्यता में भी विमानों की लैंडिंग हो पाती. लेकिन, इसमें से 360 मीटर एप्रोच लाइट ही लग पायी और जू में 360 मीटर एप्रोच लाइट का इंस्टॉलेशन तीन वर्षों से रुका हुआ है. इससे 1000 मीटर से कम दृश्यता में विमानों की लैंडिंग में आज भी परेशानी बनी हुई है. ऐसे में घने कुहासे और कम दृश्यता से यहां हर दिन बड़ी संख्या में विमान देर से परिचालित हो रहे हैं.
अस्थायी रूप से रद्द करनी पड़ीं 13 जोड़ी फ्लाइटें
धुंध के कारण दिसंबर में 13 जोड़ी विमानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. यदि पटना जू में 360 मीटर एप्रोच लाइट लग जाती, तो 200 मीटर कम दृश्यता में भी विमानों का परिचालन संभव होता और इनमें से कम से कम छह-सात जोड़ी विमान रद्द नहीं होते.
नहीं मिली पर्यावरण मंत्रालय की सहमति
पटना जू में एप्रोच लाइट लगाने को पर्यावरण मंत्रालय उचित नहीं मानता है, क्योंकि इससे पटना जू में रहने वाले जानवरों को असुविधा हो सकती है. हर 60 मीटर की दूरी पर एक एप्रोच लाइट को लगाना है. इस प्रकार पटना जू के भीतर सात एप्रोच लाइट लगनी है. वर्तमान में इनमें से केवल एक लाइट पीर अली पथ के पटेल गोलंबर वाले छोर के समीप जू कैंपस के भीतर लगी है. अन्य वहां से एक सीघी रेखा में जू के गेट नंबर दो के समीप तक लगनी हैं. इनमें से कई लाइट बड़े जानवरों के इनक्लोजर के बेहद समीप लगेंगे. ऐसे में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इसकी एनओसी देने में झिझक रहा है. हालांकि, सूत्रों की मानें, तो मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से पर्यावरण मंत्रालय की सहमति प्राप्त करने का प्रयास जारी है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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