दिन में बेचैनी खुली आंखों में कट रही रात, तसवीरों में देखें बिहार बाढ़ के हालात
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 31 Jul 2020 12:25 PM
बिहार के दो और जिलों में बाढ़ का पानी फैल गया है. इससे सूबे में बाढग्रसत जिलों की संख्या बढ़कर 14 हो गयी है. इन 14 जिलों की 3963728 आबादी बाढ़ से प्रभावित है और इसमें से 316661 लोगों को अबतक सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया गया है. आपदा प्रबंधन विभाग से बृहस्पतिवार को प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 14 जिलों - सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चंपारण, खगडिया, सारण, समस्तीपुर, सिवान एवं मधुबनी - के 108 प्रखंडों के 972 पंचायतों की 3963728 आबादी बाढ से प्रभावित है जहां से निष्क्रमित कराए गए 316661 लोगों में से 25116 व्यक्ति 19 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं. बाढ के कारण विस्थापित लोगों को भोजन कराने के लिए 1001 सामूदायिक रसोई की व्यवस्था की गयी है जहां अबतक 578272 लोगों ने भोजन किया है. दरभंगा जिला में सबसे अधिक 14 प्रखंडों के 173 पंचायतों की 1351200 आबादी बाढ से प्रभावित हुई है. बिहार के बाढ प्रभावित इन जिलों में बचाव और राहत कार्य चलाए जाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 28 टीमों की तैनाती की गयी है. तसवीरों में देखें बिहार में बाढ़ का हाल.

नदियों के जलस्तर में वृद्धि से सहसपुर, मिल्की बेलबाड़ा, काजी-बहेड़ा, करबा-तरियानी, मल्लिकपुर, रतनपुर, ब्रह्मपुर पश्चिमी व ब्रह्मपुर पूर्वी पंचायत पानी से पूरी तरह घिर गया है. लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है.

बाढ़ से प्रखंड की 12 पंचायतों में तबाही मची है. गांवों के अलावा भारत शुगर मिल्स, थाना परिसर और प्रखंड कार्यालय में भी पानी प्रवेश कर गया है.

गोपालगंज में बाढ़ से विस्थापित बड़ी संख्या में लोग पूर्वोत्तर रेलवे के रतन सराय स्टेशन से तबाही का मंजर देख रहे हैं. बाढ़ व बारिश के दौरान टूटे व क्षतिग्रस्त घरों को अब कैसे खड़ा करेंगे की चिंता विस्थापित परिवारों को सताने लगी है. बाढ़ से घिरे गांव व विस्थापित परिवारों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है.

बाढ़ की तबाही के बीच कई लोग घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लिये हुए हैं, तो कई लोग बाढ़ के पानी के बीच अपने घर की छत पर दिन-रात काटने को मजबूर हैं. इस बीच इन्हें बारिश व सांप-बिच्छू का डर तो सता ही रहा है, तो वहीं भोजन की व्यवस्था की चिंता सोने नहीं दे रही. भूख के कारण बच्चे बिलबिला रहे हैं. वहीं, बुजुर्गों की पीड़ा भी बढ़ गयी है. इस बीच अपनी जान जोखिम में डालकर युवाओं की टोली बाढ़ के पानी से होते हुए पीड़ितों को राहत देने के लिए पहुंच रही है.

बाढ़ पीड़ितों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही. बाढ़ का पानी साये की तरह पीड़ितों के पीछे पड़ा है.

बाढ़ के कारण विगत पांच दिनों से बुचेया पंचायत में बिजली आपूर्ति ठप है. इस कारण लोग अंधेरे में रहने को विवश हैं. अंधेरे के कारण सर्पदंश का खतरा भी बना हुआ है. उधर, बिजली आपूर्ति ठप रहने के कारण स्टेट बैंक की शाखा में विगत तीन दिनों से लिंक बाधित है, जिस कारण लोगों को पैसा भी नहीं मिल पा रहा है.

बाढ़ ने सुख-चैन सबकुछ छीन लिया है. बाढ़पीड़ितों का दिन बेचैनी में, तो रात खुली आंखों में कट रही है. बाढ़ के कहर से बुचेया के लालबाबू साह व नीरा देवी ही सिर्फ तबाह नहीं हैं. हजारों बाढ़पीड़ितों के दर्द की अंतहीन कहानी है. हजारों हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गयी, तो कइयों के मकान व सारे सामान बाढ़ के पानी में बह गये.

जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के कारण बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र की 42 पंचायतों में बाढ़ की तबाही है. ठेकेदारों के चंगुल में फंसे रहने के कारण इंजीनियरों ने ध्यान नहीं दिया. आठ माह तक कोई तैयारी नहीं हुई. गंभीर आरोप लगाया है बैकुंठपुर के विधायक सह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी ने.

बाढ़ से एक तरफ जहां इंसान बेहाल हैं तो दुसरी तरफ वो जानवरों के लिए भी खतरा का सबब बना हुआ है. बाढ़ के पानी में कई जानवर बह कर आ जा रहे हैं.
Posted By: Rajat Kumar
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










