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बिहार के विशेषज्ञ लिखेंगे हिंदी और मैथिली में इंजीनियरिंग, मेडिकल की किताबें...

Updated at : 03 Oct 2024 1:22 AM (IST)
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बिहार के विशेषज्ञ लिखेंगे हिंदी और मैथिली में  इंजीनियरिंग, मेडिकल की किताबें...

बिहार के चार विवि के शिक्षक हिंदी और मैथिली भाषा में इंजीनियरिंग, एमबीबीएस, कानून, कृषि और विज्ञान के पचास से अधिक किताब लिखेंगे. यूजीसी और भाषा विद चमु कृष्ण शास्त्री की अध्यक्षता में गठित भारतीय भाषा समिति भारतीय भाषाओं में पठन-पाठन के लिए पाठ्यक्रम के अनुरूप किताब लेखन एवं अनुवाद के काम में जुटी है.

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राजदेव पांडेय ,पटना

बिहार के चार विवि के शिक्षक हिंदी और मैथिली भाषा में इंजीनियरिंग, एमबीबीएस, कानून, कृषि और विज्ञान के पचास से अधिक किताब लिखेंगे. यूजीसी और भाषा विद चमु कृष्ण शास्त्री की अध्यक्षता में गठित भारतीय भाषा समिति भारतीय भाषाओं में पठन-पाठन के लिए पाठ्यक्रम के अनुरूप किताब लेखन एवं अनुवाद के काम में जुटी है.

इस समिति में बिहार के चार विश्वविद्यालयों मसलन जेपी विश्वविद्यालय , केएसडीएस विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय और एलएनएमयू के कुलपतियों को शामिल किया गया है. राज्य के ये विश्वविद्यालय हिंदी और मैथिली की किताबें तैयार करेंगे. केंद्र की मंशा है कि नयी शिक्षा नीति की मंशा के अनुरूप विभिन्न विषयों की पढ़ाई संविधान से मान्यताप्राप्त भारतीय भाषा में हो.

बिहार को विभिन्न विषयों की हिंदी भाषा में 50 से अधिक पुस्तकें लिखने की जिम्मेदारी मिली है. यह पुस्तकें स्नातक,स्नातकोत्तर और शोध पाठ्यक्रम के अनुरूप होंगी. खासतौर पर इंजीनियरिंग/ मेडिकल जैसे तकनीकी विषयों , विज्ञान, विधि एवं कृषि विषयों की किताबें हिंदी में लिखी जानी हैं. बता दें कि शुरुआती दौर में भारतीय भाषा समिति में बिहार के विश्वविद्यालयों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला था.

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इस साल कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के हस्तक्षेप के बाद बिहार के तीन विश्वविद्यालयों मसलन जेपी विश्वविद्यालय , केएसडीएस विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय के कुलपतियों को हिंदी भाषा से जुड़ी समिति में शामिल किया गया है. इस प्रोजेक्ट में बिहार की टीम को जेपी विश्वविद्यालय के कुलपति परमेंद्र कुमार बाजपेयी लीड कर रहे हैं. मैथिली में तैयार हो रहीं गणित-विज्ञान की किताबें

यूजीसी ने बिहार और झारखंड के कुल 11 विश्वविद्यालयों में जहां मैथिली की पढ़ाई होती है,वहां भाषा विषयों को छोड़ कर सभी विषयों की मूल किताबें मैथिली में तैयार की जा रही हैं. यह जिम्मेदारी एलएनएमयूको जिम्मेदारी दी गयी है. समिति के यूजीसी की तरफ से नोडल प्रतिनिधि चुने गये प्रो अशोक कुमार मेहता ने बताया कि स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के अनुरूप गणित,विज्ञान सहित सभी विषयों की किताबें मैथिली में लिखी जा रही हैं,

ताकि मूल भाषा में इच्छुक छात्र विषयों को पढ़ सकें. यह किताबें बिहार के विश्वविद्यालयों मसलन एलएनएमयू के अलावा पीयू, पीपीयू, पूर्णिया, टीएमबीयू, बीएनएमयू, केएसडीयू,बीआरएबीयू और मुंगेर विवि के अलावा झारखंड के सिद्धो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका और कोल्हान विश्वविद्यालय,चाइबासा के स्नातक पाठ्यक्रम की किताबें मैथिली में तैयार की जानी हैं.

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