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बिहार के विवि में जल्द ही दी जायेगी ड्यूअल डिग्री

Updated at : 15 May 2025 1:15 AM (IST)
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बिहार के विवि में जल्द ही दी जायेगी ड्यूअल डिग्री

शिक्षा विभाग बिहार के विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा के वैश्विक मापदंडों पर विकसित करने जा रहा है. विभाग की रणनीति है कि यूरोप के तमाम और भारत के चुनिंदा विश्वविद्यालयों की भांति बिहार के विश्वविद्यालय भी अपने विद्यार्थियों को एक साथ दो डिग्री देने में समर्थ हो जाएं.

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संवाददाता,पटना शिक्षा विभाग बिहार के विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा के वैश्विक मापदंडों पर विकसित करने जा रहा है. विभाग की रणनीति है कि यूरोप के तमाम और भारत के चुनिंदा विश्वविद्यालयों की भांति बिहार के विश्वविद्यालय भी अपने विद्यार्थियों को एक साथ दो डिग्री देने में समर्थ हो जाएं. इससे हमारे शैक्षणिक संस्थानों में बहुआयामी पढ़ायी संभव हो सकेगी. शिक्षा विभाग ने हाल ही में इस संदर्भ में बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद को इस संदर्भ में जरूरी रणनीति बनाने के लिए कहा है. विभागीय मंशा है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को मल्टी डिस्प्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सटी (मेरू) के रूप में विकसित किया जाये. हालांकि इसके लिए शर्त यह होगी कि मेरू योजना में उन्हीं विश्वविद्यालयों का चयन किया जायेगा, जो अपने विद्यार्थियों को ड्यूअल (एक साथ दो ) डिग्री देने में समर्थ हो. विभागीय योजनाकारों के अनुसार विद्यार्थियों को ड्यूल डिग्री केवल उन्हीं विषयों में दी जा सकेंगी, जो विश्वविद्यालय ऑफर करेंगे. मनचाहे किसी भी विषय में ड्यूअल डिग्री नहीं दी जा सकेगी. विश्वविद्यालय अपने उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से उन्हीं विषयों की डयूअल डिग्री देंगे, जिसमें पढ़ाई की सुविधा दे सकेंगे. ड्यूअल डिग्री से आशय -एक साथ दो-दो डिग्री प्रोग्राम करना है. इसमें स्नातक स्तर पर दो स्नातक डिग्री एक ही समय में हासिल की जा सकती हैं. बिहार में पटना विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय अभी मेरू प्रोजेक्ट के तहत शामिल किये गये हैं. इन दोनों विश्वविद्यालयों में 100-100 करोड़ रुपये खर्च किया जाना है. विभाग ने कहा है विश्वविद्यालयों के बीच एवं विश्वविद्यालयों के अंदर संस्थानों के बीच संपदा के उपयोग को साझा किया जाये. नेशनल क्रेडिट फ्रेम वर्क अंदर प्रभावी होने के लिए सभी विद्यार्थियों एवं संस्थाओं का निबंधन एबीसी पोर्टल पर किया जाना है. इसमें सभी पाठ्यक्रम के हिसाब से डिग्री अथवा क्रेडिट को अपलोड करना है. इंटर्नशिप कोर्सेज समयानुकूल होने चाहिए. इंडस्ट्रीज के साथ ऐसे कोर्स तय किये जाएं. क्रेडिट ट्रांसफर की व्यवस्था करनी होगी. हालांकि, यह तभी हो सकेगा,जब राज्य के सभी विश्वविद्यालय मेरू कार्यक्रम के दायरे में आयें. नेशनल क्रेडिट फ्रेम वर्क तथा एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट को क्रियाशील बनाने एमओओसी का पूरी तरह क्रियान्वित करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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