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साइबर फ्रॉड: न मैसेज आया न लिंक और न ही कॉल, निकल गये खाते से रुपये, जांच में जुटी पुलिस

आादिल ने पुलिस को बताया कि बैंक से जुड़ी गोपनीयता हमने भंग नहीं की है. उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें किसी साइबर फ्रॉड ने फोन भी नहीं किया. इतना ही नहीं उनके मोबाइल पर कोई मैसेज या लिंक भी नहीं आया. जब अकाउंट से पैसे निकल गये.

By Prabhat Khabar Print Desk
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पटना. साइबर अपराधियों का नेटवर्क दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. खाते से कब और कैसे पैसा निकल जायेगा, ये कोई नहीं जानता है. साइबर क्राइम का एक मामला एयरपोर्ट थाने में आया है. दरअसल शास्त्रीनगर थाने के खाजपुरा के रहने वाले आदिल रहमान के खाते से शातिरों ने 1 लाख 24 हजाार 998 रुपये की निकासी कर ली. इसमें हैरत की बात यह है कि साइबर फ्रॉड ने न तो कोई कॉल किया, न लिंक और न ही मैसेज, लेकिन खाते से रुपये की निकासी कर ली. बाद में पैसे निकासी का मैसेज आया, तो पता चला कि जालसाजों ने खाते से पैसे की निकासी कर ली है. पहली बार एक लाख और दूसरी बार में 24,998 रुपये की निकासी कर ली. आदिल का खाता एसबीआइ के शेखपुरा ब्रांच में है. आदिल ने एयरपोर्ट थाने में लिखित आवेदन दिया है. पुलिस मामला दर्ज कर छानबीन कर रही है.

क्लोनिंग के जरिये कर ली पैसे की निकासी

आादिल ने पुलिस को बताया कि बैंक से जुड़ी गोपनीयता हमने भंग नहीं की है. उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें किसी साइबर फ्रॉड ने फोन भी नहीं किया. इतना ही नहीं उनके मोबाइल पर कोई मैसेज या लिंक भी नहीं आया. जब अकाउंट से पैसे निकल गये, तब उनके मोबाइल पर पैसा निकलने का दो मैसेज आया. अब पुलिस यह आशंका जता रही है कि शातिरों ने आदिल के एटीएम कार्ड का क्लोन कर पैसे की निकासी की है. पुलिस ने आदिल से जानकारी मांगी है कि आखिरी बार किस एटीएम का इस्तेमाल किया था. इसके बाद जांच में जुट गयी है.

जालसाजों के छह और खातों को किया फ्रीज

पटना. पत्रकार नगर थाने की पुलिस ने साइबर जालसाजों के छह और खातों को फ्रीज कर दिया है. अपराधियों ने अब तक के ठगी के रुपयों को आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में ट्रांजेक्शन किये थे. पुलिस ने संबंधित बैंकों से खाता खुलने के बाद से पूरी डिटेल मांगी है. थानाध्यक्ष ने बताया कि बैंकों से डिटेल मांगी गयी है. इसके बाद खातों का पूरा ब्योरा हासिल किया जायेगा. डिटेल मिलने पर यह पता चल सकेगा कि शातिरों ने किन खातों से रकम उड़ायी है और काहां ट्रांसफर किये हैं. खातों में अंकित मोबाइल नंबर मिलने पर पुलिस पीड़ितों से बात करेगी.

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