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नीतीश की यात्राएं-5 : विकास यात्रा के दौरान टेंट में गुजरी थी रातें, खेत में की थी कैबिनेट की बैठक

Updated at : 12 Jan 2025 1:06 PM (IST)
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Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra

Nitish Kumar Yatra: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर प्रदेश की यात्रा पर हैं. 2005 में नवंबर महीने में मुख्यमंत्री बनने के पूर्व वे जुलाई महीने में न्याय यात्रा पर निकले थे. विकास यात्रा उनकी दूसरी यात्रा थी. नीतीश कुमार की अब तक 15 से अधिक यात्राएं हो चुकी हैं. आइये पढ़ते हैं इन यात्राओं के उद्देश्य और परिणाम के बारे में प्रभात खबर पटना के राजनीतिक संपादक मिथिलेश कुमार की खास रिपोर्ट की पांचवीं कड़ी..

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Nitish Kumar Yatra: विकास यात्रा की शुरूआत चार डिग्री तापमान के बीच शुरू हुई थी.जनवरी 2009 में कड़ाके की ठंड जब तापमान चार डिग्री तक पहुंच गया था, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास यात्रा के लिए निकल पड़े. छह चरणों में यह यात्रा जून की तपती लू के दौरान खत्म हुई. विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों के साथ 20 जिलों में टेंट में रात्रि विश्राम किया. हर दिन किसी एक गांव का चयन, वहां रात्रि विश्राम तथा अगली सुबह उसी गांव में जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल होकर आम लोगों से सीधा संवाद करते. उनकी समस्याओं का ऑन स्पॉट निपटारा भी होता.

बिहार गौरव गान से होती थी शुरुआत

विकास यात्रा के ठहराव स्थल पर बिहार गौरव गान, सर्वधर्म प्रार्थना सभा, स्वास्थ्य शिविर का आयोजन जिसमें मुफ्त स्वास्थ्य जांच एवं चश्मे का वितरण किया जाता. सरकारी योजनाओं का निरीक्षण, शिलान्यास और उद्घाटन भी किये गये. देर शाम जब बिहार गौरव गान का आयोजन होता तो दिन भर की थकान से जूझ रहे मन को ताजगी मिलती. देसी लोकगीतों के रस में तैयार गौरव गान झूमने को मजबूर कर देता.

शाम को लोक कलाकारों देते थे प्रस्तुति

सीतामढ़ी की एक ऐसी ही शाम याद आ रही है. मंच पर कलाकार होते. नीचे पहली पंक्ति में मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और वरिष्ठ नेता गण होते. हम पत्रकारों का एक दल पटना से यात्रा को कवर करने आया था तो हमलोग भी पहली पंक्ति के ही हिस्सा होते. सीतामढ़ी की इस शाम शिवानंद तिवारी भी मौजूद थे. शिवानंद तिवारी तब तक जदयू में शामिल हो चुके थे. देशज और लोकगीतों के शौकीन शिवानंद तिवारी भी हमलोगों के साथ ही बैठे और गीत का आनंद लिया.

पतिलार गांव में हुआ था पहला रात्रि विश्राम

विकास यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण के बगहा से हुई. जिले के पतिलार गांव में पहला रात्रि विश्राम हुआ. इसके बाद पश्चिम चंपारण के ही कटैया, पूर्वी चंपारण के परशुरामपुर और बलुआ कोठी, सीतामढ़ी के परसौनी, मधुबनी के धकजरी, दरभंगा के कमलपुर, मुजफ्फरपुर के जारंग, समस्तीपुर के झकरा, बेगूसराय के बरबीघी, खगड़िया के गनछारी-खरहा, कटिहार के बहरखाल, पूर्णिया के बेगमपुर, किशनगंज के डाकूपाड़ा-रहमतपाड़ा, बांका के मकरमडीह, भागलपुर के उधाडीह, लखीसराय के हलसी, शेखपुरा के झरपुर, केमूर के मोहनिया, बक्सर के डुमरांव, और मधेपुरा के सिंहेश्वर स्थान पर जनता का दरबार आयोजित हुआ.

बरबीघी गांव में हुई थी कैबिनेट की बैठक

विकास यात्रा के तीसरे चरण में 10 फरवरी, 2009 को पहली बार पटना से बाहर बेगूसराय के बरबीघी में कैबिनेट की बैठक हुई . इसमें 33 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी. विकास यात्रा को आठ चरणों में पूरा किया गया था. यात्रा के दौरान ही लोकसभा चुनाव की घोषणा हो गयी. यात्रा को रोक दिया गया. पहले चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिमी चंपारण के पतिलार और कटैया, पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि और बलुआ कोठी तथा सीतामढ़ी के बखरी में रातें गुजारी थीं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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