ePaper

बिहार में 72 हजार से अधिक शिक्षकों की होगी जांच, फर्जी पाए गए तो नौकरी जाएगी और वेतन की होगी ब्याज सहित वसूली

Updated at : 18 Dec 2025 2:55 PM (IST)
विज्ञापन
Bihar Teacher News| Vigilance Investigation Bureau will investigate more than 72,000 teachers in Bihar

शिक्षक की सांकेतिक तस्वीर

Bihar Teacher News: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 72 हजार से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो जांच करेगा. फर्जी पाए जाने पर नौकरी खत्म होगी और वेतन की ब्याज सहित वसूली होगी.

विज्ञापन

Bihar Teacher News: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर अब तक की सबसे बड़ी और सख्त जांच शुरू होने जा रही है. राज्य के 72,287 शिक्षकों के जाति, आधार, आय, शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों की गहन जांच की जिम्मेदारी अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) को सौंपी गई है.

इस जांच में यदि किसी शिक्षक का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया, तो उसकी सेवा तत्काल समाप्त कर दी जाएगी, साथ ही अब तक ली गई पूरी सैलरी और अन्य सरकारी सुविधाओं की राशि ब्याज सहित वसूल की जाएगी. इसके अलावा फर्जीवाड़े के आरोप में आपराधिक मामला भी दर्ज होगा.

अब तक सात बार कराई जा चुकी है जांच

यह जांच खासतौर पर वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त किए गए नियोजित शिक्षकों पर केंद्रित है. शिक्षा विभाग के अनुसार, इन वर्षों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, जिनके प्रमाण पत्रों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. अब तक विभागीय स्तर पर सात बार जांच कराई जा चुकी है, लेकिन हर बार लापरवाही और तकनीकी कारणों से वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी. इसी वजह से सरकार ने अब यह जिम्मेदारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दी है, ताकि निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके.

53,894 शिक्षकों की मार्कशीट सबसे ज्यादा संदिग्ध

जांच के दायरे में आए शिक्षकों में सबसे अधिक 53,894 शिक्षकों की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट और प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं. वहीं, शेष 18,393 शिक्षकों के बीएड, बीटीसी, बीए, दिव्यांग प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी. सभी प्रमाण पत्रों का मिलान संबंधित बोर्ड, विश्वविद्यालय, जिला कार्यालय और अन्य अधिकृत संस्थानों से कराया जाएगा.

बिहार बोर्ड समेत कई विश्वविद्यालयों के प्रमाण पत्र जांच में

जांच के दौरान बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) के 46,681 प्रमाण पत्रों को शामिल किया गया है. इसके अलावा संस्कृत बोर्ड के 1,763 और मदरसा बोर्ड के 5,450 प्रमाण पत्र भी संदेह के घेरे में हैं. विश्वविद्यालय स्तर पर भी बड़ी संख्या में प्रमाण पत्रों की जांच हो रही है.

  • तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के 666
  • मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के 4,924
  • नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना के 114
  • पटना विश्वविद्यालय के 383
  • वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के 2,296
  • ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के 2,934
  • दूरस्थ शिक्षा के 882
  • कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के 395
  • जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के 395
  • बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के 1,902
  • बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के करीब 2,000 प्रमाण पत्र जांच के दायरे में हैं.

राज्यकर्मी बने शिक्षक भी जांच से बाहर नहीं

इस जांच की सबसे अहम बात यह है कि सक्षमता परीक्षा और टीआरई-1, 2 और 3 पास कर राज्यकर्मी बने शिक्षक भी इसकी जद में होंगे. शिक्षा विभाग के अनुसार, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर 40 हजार से अधिक शिक्षक राज्यकर्मी बन चुके हैं. यदि जांच में इनमें से किसी का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया, तो उनकी नौकरी भी समाप्त होगी और अब तक मिली सैलरी व अन्य सुविधाओं की रिकवरी की जाएगी.

420 मामलों में एफआईआर की तैयारी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की प्रारंभिक जांच में 420 मामलों में आपराधिक केस दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है. अगस्त से अक्टूबर के बीच ही 106 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है. हाल के दिनों में नवादा, कटिहार और सारण जैसे जिलों में कई शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मचा हुआ है.

शिक्षा मंत्री का सख्त संदेश

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने साफ कहा है कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वालों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी. प्रत्येक जिले में बोर्ड, विश्वविद्यालय और जिला कार्यालय स्तर पर प्रमाण पत्रों की जांच कराई जा रही है. जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जांच में पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं.

लाखों नियुक्तियों का सवाल

बिहार में वर्तमान में करीब 81 हजार स्कूलों में 5.80 लाख शिक्षक कार्यरत हैं. वर्ष 2006 से 2016 के बीच 3.68 लाख नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. इनमें से लगभग 2.60 लाख शिक्षक सक्षमता परीक्षा पास कर राज्यकर्मी बन चुके हैं, जबकि शेष के लिए परीक्षा प्रक्रिया जारी है. अब इस व्यापक जांच के बाद यह साफ हो जाएगा कि शिक्षा व्यवस्था में कितनी बड़ी सेंध फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए लगी है.

Also Read: Lalu Yadav: फिर काम आई बेटी! चुपके से लालू यादव पहुंचे इस बेटी के पास… कानों कान नहीं हुई खबर

विज्ञापन
Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन