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Bihar Success Story: बिहार में जेल में बंद कैदी पास कर रहे मैट्रिक और साक्षरता परीक्षा, लोगों के बीच पेश की मिसाल

Updated at : 01 Sep 2025 3:45 PM (IST)
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Bihar Success Story Prisoners in jail passing matriculation and literacy exams

सासाराम जेल में मैट्रिक की परीक्षा पास करने वाले कैदी

Bihar Success Story: बिहार के जेलों में बंद कैदी लोगों के बीच मिसाल पेश कर रहे हैं. कहीं कैदी मैट्रिक की परीक्षा तो कहीं साक्षरता परीक्षा पास कर रहे हैं. सासाराम में जेल में बंद तीन बंदियों ने मैट्रिक की परीक्षा पास की. तो वहीं बेऊर जेल में बंद 964 कैदी साक्षरता परीक्षा पास किए.

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Bihar Success Story: समाज अक्सर अपराधियों को उनके अतीत की पहचान से बांधकर देखता है. जेल की ऊंची-ऊंची दीवारें मानो इस सोच को स्थायी रूप से गढ़ देती हैं कि अपराधी केवल सजा के हकदार हैं, अवसर के नहीं. लेकिन सासाराम जेल से जुड़ी यह खबर इस दृष्टिकोण को चुनौती देती है. यहां तीन बंदियों ने दसवीं की परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया है कि इंसान का भविष्य उसकी गलतियों से नहीं, बल्कि उसके संकल्प से तय होता है.

जेल प्रशासन की जमकर हो रही तारीफ

सासाराम से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद जेल प्रशासन की भी जमकर सराहना हो रही है. दरअसल, जिस तरह से कैदियों के लिए सुविधा उपलब्ध कराई गई और उन्हें परीक्षा देने का अवसर दिया गया. तीनों बंदियों ने भी जिज्ञासा दिखाते हुए परीक्षा पास की, इसके लिए जमकर जेल प्रशासन की तारीफ की गई है.

बेऊर जेल में 964 बंदी साक्षरता परीक्षा पास

बिहार में सासाराम के अलावा बेऊर जेल में भी 964 बंदी साक्षरता परीक्षा पास हुए. दरअसल, आदर्श केन्द्रीय कारा बेऊर जेल में रविवार को साक्षरता महाअभियान के तहत बंदियों के बीच साक्षरता परीक्षा का आयोजन किया गया. परीक्षा में कुल 965 बंदी शामिल हुए, जिनमें 925 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल हुई. इस परीक्षा में सभी बंदी पास हो गये.

साक्षरता महाअभियान की शुरूआत

दरअसल, बंदियों को साक्षर करने के लिए साक्षरता महाअभियान शुरू किया गया है. इसके तहत निरक्षर बंदियों के लिए एक अलग वार्ड बनाया गया है. इस अभियान के तहत बेऊर जेल को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इस तरह की पहल बेहद खास मानी जा रही है.

हर इंसान में बदलाव की क्षमता

बिहार में इस तरह से जेलों में कैदियों को दिए जा रहे अवसर से हर इंसान के भीतर बदलाव की क्षमता है. प्रश्न यह नहीं कि वे अतीत में क्या थे, बल्कि यह है कि हम उन्हें भविष्य में क्या बनने देंगे. कैदी अक्सर अपने अपराध की छाया में जीते हैं. समाज उनकी हर पहचान को अतीत की गलती से जोड़ देता है. लेकिन, जब वे छात्र बनते हैं, जब वे परीक्षा पास करते हैं, तब वे अपनी पहचान के उस घेरे को तोड़ते हैं.

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Preeti Dayal

लेखक के बारे में

By Preeti Dayal

डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.

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