नीतीश कुमार के दिल्ली जाते ही बदल जाएगी बिहार की तस्वीर, अब तेजस्वी बनाम बीजेपी का मुकाबला?

Published by :Paritosh Shahi
Published at :13 Apr 2026 4:57 PM (IST)
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Tejashwi-Yadav-Samrat-Choudhary

तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी

Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के दिल्ली जाने से बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है. दो दशक तक सत्ता के केंद्र रहे नीतीश के हटते ही जदयू कमजोर पड़ सकती है. अब राज्य की राजनीति बीजेपी और आरजेडी के बीच सीधी लड़ाई की ओर बढ़ती दिख रही है.

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Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है. पिछले 20 साल से नीतीश कुमार राज्य की राजनीति के सबसे बड़े केंद्र रहे हैं. सरकार किसी की भी रही हो, सत्ता की चाबी हमेशा उनके हाथ में रही. अब उनके दिल्ली जाने और राज्यसभा में सक्रिय होने के बाद बिहार में नया राजनीतिक दौर शुरू हो सकता है.

अब बीजेपी के हाथ में कमान

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की चर्चा के बीच माना जा रहा है कि बिहार में पहली बार बीजेपी अपने दम पर मुख्यमंत्री बनाएगी. यह राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा. अब तक बीजेपी नीतीश कुमार के साथ छोटे साझेदार की भूमिका में थी, लेकिन अब वह सीधे सत्ता की कमान संभालने जा रही है.

नीतीश कुमार के हटने से बिहार की राजनीति का पुराना त्रिकोणीय समीकरण बदल सकता है. अब तक मुकाबला बीजेपी, जदयू और आरजेडी के बीच था, लेकिन आगे यह लड़ाई सीधे बीजेपी और आरजेडी के बीच सिमट सकती है. जदयू की भूमिका कमजोर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जदयू का जनाधार काफी हद तक नीतीश कुमार के चेहरे पर टिका था. उनके हटते ही पार्टी को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. बीजेपी अपना जनाधार बढ़ाने के लिए जदयू के पारंपरिक लव-कुश और अति पिछड़ा वोट बैंक पर भी नजर रखेगी. वहीं तेजस्वी यादव भी इसी सामाजिक आधार को साधने की कोशिश करेंगे.

राजद के पास मौका

तेजस्वी यादव के लिए यह बड़ा मौका माना जा रहा है. अब उन्हें नीतीश कुमार के अचानक राजनीतिक फैसलों की चिंता नहीं रहेगी. वे सीधे बीजेपी के खिलाफ अपनी राजनीति मजबूत कर सकते हैं. बेरोजगारी, जातीय जनगणना, सामाजिक न्याय और विशेष राज्य के दर्जे जैसे मुद्दों को लेकर आरजेडी आक्रामक रणनीति अपना सकती है.

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बीजेपी अब खुलकर खेलेगी

दूसरी ओर बीजेपी पहली बार बिहार में खुलकर अपना एजेंडा लागू करने की स्थिति में होगी. नीतीश कुमार के रहते पार्टी हिंदुत्व के मुद्दों पर पूरी तरह खुलकर नहीं खेल पाती थी. अब विकास के साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भी उसकी राजनीति का बड़ा हिस्सा बन सकता है.

बिहार की राजनीति अब यूपी की तरह दो ध्रुवों में बंटती दिख रही है. जैसे उत्तर प्रदेश में मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच सिमट गया. बसपा का हाल चुनाव दर चुनाव खराब होता जा रहा है. वैसे ही बिहार में आगे बीजेपी और आरजेडी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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