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Bihar News: मोतीहारी में तिरंगा यात्रा पर बवाल,अपने ही इलाके में घिरे पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार

Updated at : 12 Aug 2025 10:59 AM (IST)
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अपने ही इलाके में फंसे पूर्व मंत्री

अपने ही इलाके में फंसे पूर्व मंत्री

Bihar News: तिरंगे के नीचे निकली यात्रा कुछ ही मिनटों में चुनावी जंग के मैदान में बदल गई—क्या यह महज असामाजिक तत्वों की हरकत थी या छिपी हुई राजनीतिक रणनीति?

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Bihar News: देशभक्ति के रंग में रंगी तिरंगा यात्रा का मकसद था राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का संदेश, लेकिन मोतीहारी में यह यात्रा विवाद और टकराव के साये में आ गई. भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार को अपने ही विधानसभा क्षेत्र में विरोध, झंडा-बैनर फाड़ने और मारपीट की घटना का सामना करना पड़ा.

घटना का केंद्र: टिकुलिया गांव

घटना मुफसिल थाना क्षेत्र के ढेकहा पंचायत के टिकुलिया गांव की है. विधायक प्रमोद कुमार के अनुसार, मंडल अध्यक्ष की अध्यक्षता में यह तिरंगा यात्रा क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और देशभक्ति का संदेश देने के लिए निकाली गई थी. लेकिन जैसे ही रथ टिकुलिया पहुंचा, कथित असामाजिक तत्वों और “देशद्रोही” मानसिकता के लोगों ने रास्ता रोक लिया. आरोप है कि उन्होंने तिरंगा रथ पर लगे बैनर-पोस्टर और झंडे को फाड़ डाला और देशविरोधी नारे लगाने लगे.

विरोध से हिंसा तक

विधायक का कहना है कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन विरोध करने वाले लोग और उग्र हो गए. कथित तौर पर, उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों से धक्का-मुक्की, मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ तक कर डाली. स्थिति बिगड़ते देख तिरंगा यात्रा को बीच में ही रोककर लौटना पड़ा.
इस पूरे प्रकरण को लेकर विधायक ने मुफसिल थाना में लिखित आवेदन दिया है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई है. पुलिस ने आवेदन प्राप्त कर लिया है और वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान करने में जुटी है.

राजनीतिक पृष्ठभूमि के संकेत

स्थानीय सूत्र बताते हैं कि इस घटना के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और क्षेत्रीय गुटबाज़ी का हाथ हो सकता है. तिरंगे के नाम पर शुरू हुआ यह जुलूस कुछ ही मिनटों में चुनावी जंग के रंग में रंग गया, जिसमें कानून-व्यवस्था की परीक्षा भी हो गई.

अब देखना यह है कि मुफसिल थाना पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से आरोपियों तक पहुंचती है और क्या इस तिरंगा विवाद का सच महज असामाजिक तत्वों की हरकत है, या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक पटकथा छिपी है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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