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Bihar Budget 2026: बिहार में तैयार होगा AK-47, कार्बाइन, पिस्टल और स्नाइपर राइफल, बजट में डिफेंस कॉरिडोर बनाने की हुई घोषणा

Updated at : 03 Feb 2026 6:45 PM (IST)
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bihar defence corridor in budget

बिहार में बनेगा डिफेंस कॉरिडोर, सर्कल में नीतीश कुमार

Bihar Budget 2026: बिहार बजट 2026-27 में सरकार ने बड़ा औद्योगिक ऐलान किया है. राज्य में डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाने की घोषणा की गई है. इससे निवेश और रोजगार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

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Bihar Budget 2026: बिहार सरकार ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए राज्य के औद्योगिक भविष्य से जुड़ा बड़ा ऐलान किया है. बजट में बिहार में डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाने की घोषणा की गई है. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से बिहार को औद्योगिक नक्शे पर नई पहचान मिलेगी. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

25 नवंबर को नीतीश सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही डिफेंस कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क के लिए समिति गठित करने को मंजूरी दी गई थी. अब बजट में इसका औपचारिक ऐलान कर सरकार ने संकेत दे दिया है कि इस दिशा में तेजी से काम शुरू होगा.

क्या है डिफेंस कॉरिडोर?

डिफेंस कॉरिडोर एक ऐसा औद्योगिक रूट होगा, जिसमें बिहार के कई जिले शामिल किए जाएंगे. इन जिलों में सेना और सुरक्षा बलों के लिए जरूरी सामान बनाने वाली इंडस्ट्री लगाई जाएगी. इस कॉरिडोर में सरकारी और निजी, दोनों तरह की कंपनियां हिस्सा लेंगी. यहां हथियारों से लेकर सैन्य वर्दी तक का निर्माण किया जाएगा. ड्रोन, तोप, AK-47, कार्बाइन, पिस्टल और स्नाइपर राइफल जैसे आधुनिक हथियार भी यहीं बनाए जाने की योजना है.

बिहार में प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर के तहत मुंगेर, कैमूर, जमुई, बांका और अरवल जैसे जिलों को शामिल किया जा सकता है. ये जिले पहले से ही हथियार निर्माण से किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं.

नालंदा और मुंगेर की पुरानी पहचान

वर्तमान में नालंदा में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के तहत फैक्ट्री संचालित है. यह देश की इकलौती फैक्ट्री है, जहां बाय मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम (BMCS) का उत्पादन होता है. इसी सिस्टम से बोफोर्स सहित कई तोपों से गोले दागे जाते हैं. नालंदा में बने BMCS का निर्यात भी किया जाता है.

वहीं, मुंगेर का इतिहास भी हथियार निर्माण से जुड़ा रहा है. वर्ष 1760 में मीर कासिम ने यहां बंदूक कारखाना शुरू किया था. अंग्रेजों के दौर में भी यहां गन फैक्ट्री लगी. आज भी मुंगेर में हथियार बनते हैं, हालांकि अवैध हथियारों को लेकर इसकी छवि धूमिल हुई है. डिफेंस कॉरिडोर से जुड़ने के बाद उम्मीद है कि मुंगेर को उसकी पुरानी औद्योगिक पहचान वापस मिलेगी.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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