बिहार की बेटी अपूर्वा IPS से बनी IAS, UPSC में 42वीं रैंक लाकर रचा नया इतिहास

अपूर्वा वर्मा की फाइल फोटो
UPSC Toppers From Bihar: पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज की बेटी अपूर्वा वर्मा ने यूपीएससी परीक्षा में 42वां रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया है. खास बात यह है कि वह पहले से आईपीएस अधिकारी हैं और दिल्ली में एसीपी के पद पर कार्यरत रहते हुए ही उन्होंने तैयारी जारी रखी. उनकी इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है.
UPSC Toppers From Bihar: पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज की बेटी अपूर्वा वर्मा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े सपने सिर्फ बड़े शहरों के नहीं होते. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में अपूर्वा ने देशभर में 42वां रैंक हासिल किया है. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने आईएएस बनने का अपना सपना साकार कर लिया है. उनकी इस सफलता से नरकटियागंज शहर ही नहीं, पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है. लोग इसे इलाके के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं.
पहले बनीं आईपीएस, फिर हासिल किया आईएएस का मुकाम
अपूर्वा वर्मा की सफलता की कहानी मेहनत, धैर्य और संकल्प की मिसाल है. उन्होंने पहले भी यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की थी. वर्ष 2022 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ था.
वर्तमान में वह दिल्ली में एसीपी के पद पर कार्यरत थी. हालांकि उनका लक्ष्य आईएएस बनना था. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी. लगातार मेहनत और लगन के बाद उन्होंने इस बार यूपीएससी परीक्षा में 42वीं रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा कर लिया.
शिक्षा के माहौल में मिली प्रेरणा
अपूर्वा वर्मा प्रखंड के सुगौली गांव की रहने वाली हैं. वह स्वर्गीय शिक्षाविद और टीपी वर्मा महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य स्व. रिपुसूदन प्रसाद वर्मा की पोती हैं. उनके पिता अजीत कुमार वर्मा बोकारो स्टील प्लांट में इंजीनियर हैं, जबकि उनकी माता आभा वर्मा गृहिणी हैं. परिवार में शुरू से ही शिक्षा को काफी महत्व दिया जाता रहा है. इसी माहौल ने अपूर्वा को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया.
शुरू से ही मेधावी रही हैं अपूर्वा
अपूर्वा वर्मा पढ़ाई में शुरू से ही काफी तेज रही हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा बोकारो में हुई. उन्होंने डीपीएस बोकारो से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने एनआईटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं.
परिवार को बेटी पर गर्व
अपूर्वा की सफलता से उनका परिवार काफी भावुक और गर्व महसूस कर रहा है. उनके चाचा मंजीत वर्मा और रंजीत वर्मा ने बताया कि अपूर्वा का लक्ष्य शुरू से ही आईएएस बनना था. वे जब भी गांव आती थीं, तो ज्यादातर समय पढ़ाई में ही लगाती थीं. बेहतर रैंक हासिल करने की जिद ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
शहर में खुशी की लहर
अपूर्वा की सफलता की खबर मिलते ही नरकटियागंज और आसपास के इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. लोग इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बता रहे हैं.
उनके चाचा मंजीत वर्मा ने कहा कि अपूर्वा ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे नरकटियागंज और जिले का नाम रोशन किया है. वहीं रंजीत वर्मा ने कहा कि यह सफलता स्व. रिपुसूदन प्रसाद वर्मा के सपनों को साकार करने जैसी है.
बेटियों की सफलता से बढ़ता है समाज का सम्मान
मंजीत वर्मा की पत्नी संगीता वर्मा और रंजीत वर्मा की पत्नी रंजना वर्मा ने कहा कि यह परिवार के लिए बेहद गौरव का पल है. जब बेटियां बड़ी सफलता हासिल करती हैं, तो पूरे परिवार का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.
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By Abhinandan Pandey
भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.
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