12.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

बिहार में बाढ़ से अब फसलें नहीं होंगी खराब, सिंघाड़े की खेती से किसान होंगें मालामाल

भारत में सिंघाड़े को महत्वपूर्ण जलीय फसलों में विशेष स्थान प्राप्त है. इसे जलीय अखरोट की फसल भी कहते है. सिंघाड़े की खेती विशेषकर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पानी में किया जाता है.सिंघाड़ा औषधीय गुणों से भरपूर और अधिक मुनाफा देने वाली खेती मानी जाने लगी है.

भारत में सिंघाड़े को महत्वपूर्ण जलीय फसलों में विशेष स्थान प्राप्त है. इसे जलीय अखरोट की फसल भी कहते है.हमारे देश में आम दिनों से लेकर पूजापाठ के लिए सिंघाड़ा का इस्तेमाल होता है.यह आमतौर पर खाने योग्य अखरोट के रूप में प्रयोग किया जाता है.सिंघाड़े की खेती कच्चे फल के रूप में की जाती है.सिंघाड़े की खेती विशेषकर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पानी में किया जाता है.सिंघाड़ा औषधीय गुणों से भरपूर और अधिक मुनाफा देने वाली खेती मानी जाने लगी है.

सिंघाड़ा जलीय पौधा है

बिहार में बाढ़ का पानी किसानों के लिए लाभदायक होने वाला है क्योंकि पोषक तत्व से भरपूर सिंघाड़ा फल कि खेती को तालाबों और जिस जगह पर 2 से 3 फ़ीट तक पानी हो वहां आसानी से किया जा सकता है.किसान इसका बरसात के मौसम में लाभ उठा सकते हैं.कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली सिंघाड़े की खेती को मछुआरों के अलावा सामान्य किसान भी अपना रहे हैं. सिंघाड़ा जलीय पौधा है.जलजमाव वालें खेतों में किसान कांटा रहित सिंघाड़े की खेती करके लाखों कमा सकते हैं.

क्षारीय पीएच मान वाले जल होती है अच्छी उपज

सिंघाड़े की बेहतर पैदावार के लिए जलाशयों की मिट्टी अधिक भुरभुरी और मिट्टी में ह्युमस भी अच्छी मात्रा में हो तो सिंघाड़े की पैदावार काफी बेहतर होती है.क्षारीय पीएच मान वाले जल में उपज अच्छी मिलती है.इस फसल में बीमारियां और कीट भी अधिक लगते हैं.सिंघाड़ा को बिहार,पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश राज्य में खूब उगाया जाता है.बिहार और झारखंड राज्य के अलावा और भी कई राज्य सरकार सिंघाड़ा उत्पादन के लिए नर्सरी और सब्सिडी की भी सुविधा प्रदान कर रही हैं.

सिंघाड़ा में भरपूर मात्रा में  कैल्शियम होता है

सिंघाड़ा खाने के बहुत सारे फायदे होते हैं इसमें भरपूर कैल्शियम होता है.यह फाइबर और विटामिन बी का भी एक अच्छा स्रोत है.लाल छिल्का सिंघाड़ा हरे छिल्का सिंघाड़ा के अलावा कुछ और किस्में हैं.जिसमे लाल गठुआ, हरीरा गठुआ, लाल चिकनी गुलरी और कटीला शामिल है . यह किस्में 120 से 130 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. देर से उपज देने वाली किस्मो में गुलरा हरीरा, गपाचा और करिया हरीरा शामिल हैं.जो 150 से 160 दिन में तोड़ी जाती है.इसके पौधों का रोपण मानसून के महीने में करना काफी बेहतर होता है .

कम लागत में ज्यादा मुनाफा

सिंघाड़े की फसल 18 महीने की होती है . जिसमे एक हेक्टेयर के तालाब से 80 से 100 क्विंटल तक हरे फल की पैदावार प्राप्त हो जाती है. और 18 से 20 क्विंटल सूखी गोटी भी मिल जाती है. सिंघाड़े की प्रति हेक्टेयर की फसल में 50 हज़ार की लागत आती है. इस तरह से अगर सभी खर्चो को निकाल दिया जाए तो 1 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा लिया जा सकता है.

Prabhat Khabar Digital Desk
Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel