Bihar Economic Survey: बिहार की इंडस्ट्रियल इकोनॉमी हुई मजबूत, जानिए क्या बताते हैं आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े

बिहार आर्थिक सर्वेक्षण
Bihar Economic Survey: बिहार विधानसभा में 2 फरवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया. इस दौरान राज्य में इंडस्ट्रियल इकोनॉमी के मजबूत होने का जिक्र किया गया. आंकड़ों के मुताबिक, पांच साल में प्रति व्यक्ति पूंजी निवेश दोगुना होने की जानकारी दी गई.
Bihar Economic Survey: 2 फरवरी बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया. बिहार में इंडस्ट्रियल इकोनॉमी मजबूती के संकेत दे रही है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक राज्य में प्रति व्यक्ति संलग्न स्थिर पूंजी निवेश (Fixed Capital Investment) साल 2019-20 में 11.7 लाख रुपए था, जो 2023-24 में बढ़कर 25.9 लाख रुपए हो गया. यानी कि पांच सालों में यह दोगुने से भी अधिक बढ़ा है. यही नहीं, फाइनेंशियल ईयर 2022-23 और 2023-24 में बिहार का प्रति व्यक्ति स्थिर पूंजी निवेश राष्ट्रीय औसत से भी अधिक दर्ज किया गया है.
निवेश में विस्तार से लेबर प्रोडक्टिविटी पर असर
सर्वेक्षण के मुताबिक, देश के कुल स्थिर पूंजी निवेश में बिहार की हिस्सेदारी 0.4 प्रतिशत से बढ़कर 0.78 प्रतिशत हो गई है. यह राज्य में मजबूत पूंजी निर्माण और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है. निवेश में इस विस्तार का असर लेबर प्रोडक्टिविटी पर भी पड़ा है. प्रति संलग्न व्यक्ति शुद्ध मूल्यवर्धन (एनवीए) साल 2023-24 में बढ़कर 10 लाख रुपए तक पहुंच गया, जो राष्ट्रीय औसत के 93.5 प्रतिशत के बराबर है.
महिला उद्यमिता को मिला बढ़ावा
उद्योगों में एक अहम बदलाव महिला उद्यमिता (Women Entrepreneurship) के रूप में सामने आया है. खासकर खुद के श्रम आधारित निर्माण इकाइयों में बिहार में महिला मालिकों की हिस्सेदारी 67.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है. माना जा रहा है कि यह संकेत देता है कि राज्य में परिवार आधारित और छोटे उद्योगों की कमान बड़ी संख्या में महिलाओं के हाथों में है. राज्य सरकार को 2016-17 से सितंबर 2025 तक 4,353 निवेश प्रस्ताव मिले, जिनमें से 1.11 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.
बिजली की उपलब्धता और खपत में सुधार
बिहार में बिजली की उपलब्धता और खपत दोनों में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली खपत साल 2011-12 में 134 यूनिट थी, जो 2024-25 में बढ़कर 374 यूनिट हो गई है.
बीते 13 सालों में यह लगभग 2.8 गुना बढ़ोतरी है. इससे साफ है कि बिहार अब ऊर्जा की कमी वाले राज्य की छवि से बाहर निकल रहा है. शहर और गांव के बीच बिजली आपूर्ति का अंतर भी लगभग खत्म हो गया है. शहरी इलाकों में जहां 23 से 24 घंटे बिजली दी जा रही है जबकि ग्रामीण इलाकों में 22 से 23 घंटे आपूर्ति हो रही है.
बिजली खपत में किसकी हिस्सेदारी रही सबसे ज्यादा
बिजली खपत में घरेलू उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा लगभग 48 प्रतिशत है. उद्योग और व्यापार क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यह संकेत देता है कि ऊर्जा उपलब्धता के साथ आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं. राज्य में बिजली उत्पादन और खरीद 2020-21 के 3,207 करोड़ यूनिट से बढ़कर 2024-25 में 5,119 करोड़ यूनिट हो गई है. ऊर्जा मंत्री के अनुसार, प्रति व्यक्ति बिजली खपत का बढ़ना उद्योग, रोजगार और ग्रामीण इकोनॉमी के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है.
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By Preeti Dayal
डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.
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