Bihar chunaav : NDA में नहीं बनी बात तो, अकेले लड़ेंगे चुनाव: ओमप्रकाश राजभर

ओमप्रकाश राजभर
Bihar chunaav : उत्तर प्रदेश की सियासत में ओबीसी राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक ओमप्रकाश राजभर अब बिहार की धरती पर भी अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का परचम लहराने की तैयारी में हैं. उन्होंने साफ कहा है कि एनडीए से बातचीत जारी है, और पहली प्राथमिकता गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की है. लेकिन यदि बात नहीं बनी, तो पार्टी अपने दम पर बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ेगी.
Bihar chunaav: ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया कि बिहार में राजभर, राजवंशी, बिंद और अन्य अति-पिछड़ी जातियों के बीच उनकी पार्टी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है. वे इस सामाजिक आधार को राजनीतिक ताकत में बदलना चाहते हैं.
“बात बनी तो एनडीए के साथ, नहीं तो मैदान में अकेले उतरने को तैयार हैं” – सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का यह बयान साफ संकेत है कि वे बिहार में एक नई ओबीसी ध्रुवीकरण की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी बात एनडीए के साथ चल रही है. पहली कोशिश एनडीए के साथ रहकर बिहार में विधानसभा चुनाव को लड़ने की है. अगर हमारी बात नहीं बनी तो भी उनकी पार्टी अपने दम पर बिहार में चुनाव लड़ेगी. राज्य के राजभर, राजवंशी जैसी जातियों के लोग बिहार में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ताकत को दिखाएंगे.
NDA में नहीं बनी बात तो दिखाएंगे ताकत
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मैंने आप सभी से यह वादा किया था कि आप लोगों के बीच से ही विधायक बनाकर के विधानसभा में भेजूंगा. मुझे उस वादे को पूरा करना है. उनका कहना था कि वह एनडीए गठबंधन के साथ हैं. चुनाव लड़ने को लेकर के करीब 70 प्रतिशत बात फाइनल हुई है. 30% बात बची हुई है.अगर हमारी बात बन गई तो बहुत अच्छा, नहीं तो पार्टी विधानसभा चुनाव को लेकर के पूरे तरीके से तैयार है.
ओमप्रकाश राजभर ने किए कई बड़े ऐलान
बिहार की धरती से ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा एलान कर दिया है. अगर उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से कोई विधायक या मंत्री बनता है, तो भूमिहीनों को ज़मीन दी जाएगी, और गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.
पटना में आयोजित ‘सुहेलदेव कार्यकर्ता सम्मेलन’ में राजभर का यह घोषणा-पत्र सिर्फ वादों की सूची नहीं था, बल्कि कार्यकर्ताओं के दिलों में उम्मीद की मशाल था। उन्होंने मंच से कहा,
अगर बिहार में हमारा विधायक बना, तो वो आपके गांव, आपके प्रखंड और जिले की आवाज़ बनकर विधानसभा में खड़ा होगा. राजभर ने अपने कार्यकर्ताओं से भावनात्मक अपील की—
हर कार्यकर्ता अपने घर पर पार्टी का झंडा फहराए और जब विरोधी कहें कि डर लग रहा है, तो गर्व से कहिए – जो डर गया, वो मर गया.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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