Bihar Cabinet : नीतीश कुमार ने बनाये दो नये रिकार्ड, पहली बार कैबिनेट की सीट हुई फुल
Published by : Ashish Jha Updated At : 26 Feb 2025 11:32 PM
नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी
Bihar Cabinet : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2005 में राज्य की कमान संभाली थी. तब से सरकार चला रहे नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल का गठन अपने हिसाब से ही किया, लेकिन इस बार नया रिकार्ड बन गया.
Bihar Cabinet : पटना. बिहार में बुधवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ. बीजेपी कोटे से 7 नये मंत्रियों ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली. इसके साथ ही करीब 20 साल पहले बिहार की सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार ने दो नये रिकार्ड बना लिये. नीतीश कैबिनेट में पहली बार जदयू से ज्यादा भाजपा के मंत्रियों की संख्या हो गयी. साथ ही 20 वर्षों में पहली बार नीतीश कैबिनेट हाउसफुल हुआ है. बीजेपी कोटे से बुधवार को संजय सरावगी, डॉ सुनील कुमार, जीवेश मिश्रा, राजू कुमार सिंह, मोतीलाल प्रसाद, विजय कुमार मंडल औऱ कृष्ण कुमार मंटू ने मंत्री पद की शपथ ली. बिहार सरकार में पहले से ही मुख्यमंत्री को लेकर 30 मंत्री थे. एक मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस्तीफा दिया और 7 नये मंत्रियों ने शपथ ली. लिहाजा बिहार में मंत्रियों की कुल संख्या 36 हो गयी.
नीतीश काल में पहली बार मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री
संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक बिहार में इससे ज्यादा मंत्री नहीं हो सकते हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1ए) के अनुसार, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या, विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए. बिहार में विधानसा में कुल 243 सदस्य है. इसका 15 प्रतिशत 36.45 होता है. इसका अर्थ ये है कि बिहार में मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री ही बन सकते हैं. नीतीश कुमार के राज में पहली दफे ऐसा हुआ है कि मंत्रियों की सारी सीट फुल हो गयी है. उदाहरण के लिए हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी पिछली सरकार को ही देखें तो 2022 में बनी जेडीयू, आरजेडी औऱ कांग्रेस की सरकार में कुल 31 मंत्री थे. उससे पहले 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद जब बीजेपी और जेडीयू की सरकार बनी थी तब भी मंत्रिमंडल में सिर्फ 30 मंत्री ही थे.
मंत्रियों का पद खाली छोड़ना रणनीति का हिस्सा
नीतीश कुमार अपनी खास रणनीति के तहत ही मंत्रियों का पद खाली छोड़ते रहे हैं. मंत्री पद खाली रहने से विधायकों में ये उम्मीद रहती है कि उन्हें भी मंत्री बनाया जा सकता है. लिहाजा पार्टी को उनके विद्रोह की आशंका कम सताती है. नाराज विधायकों का मंत्री बनाने का लॉलीपॉप थमा कर शांत करने की रणनीति भी काम करती रही है. वैसे, तो अब तक बीजेपी भी नीतीश कुमार की तरह ही मंत्रियों का कुछ पद खाली छोड़ती रही है. लेकिन अब केंद्र के साथ साथ बिहार की सत्ता पर काबिज बीजेपी को अब विधायकों के किसी विद्रोह की आशंका नहीं है. बीजेपी को अपनी मजबूती का अंदाजा है. वहीं, इसी साल चुनाव भी होने वाले हैं. लिहाजा विधायकों के विद्रोह की आशंका कम है. विधायकों को मंत्री बनने से ज्यादा चुनाव में टिकट मिलने और जीत हासिल करने की फिक्र सता रही है.
पहली बार जेडीयू के सहयोगी से कम मंत्री
इस मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक और नया रिकार्ड बना है. वैसे तो जेडीयू ने अपने हिस्से के विभाग नहीं छोड़े हैं. लेकिन उसके मंत्रियों की तादाद बीजेपी के मुकाबले काफी कम हो गये हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार समेत जेडीयू के सिर्फ 13 मंत्री हैं. वहीं, बीजेपी के मंत्रियों की संख्या 21 हो गयी है. इसके अलावा एक निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह और हम के संतोष कुमार सुमन भी मंत्री हैं. लेकिन ऐसा पहली दफे हुआ है कि नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में किसी दूसरी पार्टी के मंत्री की तादाद जेडीयू के मंत्रियों की संख्या की तुलना में डेढ़ गुणा से भी ज्यादा हो गया है. मंत्रिमंडल में जेडीयू के सिर्फ 13 मंत्री हैं तो बीजेपी के 21. अगर निर्दलीय सुमित सिंह भी जेडीयू कोटे में जोड़ लिया जाये तो भी बीजेपी के मंत्रियों की संख्या जेडीयू की तुलना में डेढ़ गुणा है.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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