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Bihar Bhumi: भूमि विवादों के निपटारे की बदली व्यवस्था,अंचल कार्यालयों में होगी साप्ताहिक बैठक

Updated at : 03 Sep 2025 9:23 AM (IST)
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Bihar Bhumi: बिहार में लंबे समय से उलझे भूमि विवाद अब तेजी से सुलझाने की कोशिश की जा रही है. थानों में होने वाली बैठकों की जगह अब हर शनिवार अंचल कार्यालय में सुनवाई होगी, जिससे लोगों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो सके.

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Bihar Bhumi: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि विवादों के समाधान की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है. अब भूमि विवाद से जुड़े मामलों की साप्ताहिक बैठकें सीधे अंचल कार्यालय परिसर में आयोजित की जाएंगी.

विभाग का कहना है कि इस बदलाव से न केवल लंबित मामलों का समय पर निपटारा होगा, बल्कि लोगों को बार-बार थाने और अन्य कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलेगी.

क्यों बदली व्यवस्था?

पहले भूमि विवादों की बैठकें थानों में आयोजित होती थीं, जिसमें थानाध्यक्ष और अंचलाधिकारी संयुक्त रूप से सुनवाई करते थे. लेकिन कई बार थानाध्यक्ष विधि-व्यवस्था या जिला स्तरीय बैठकों में व्यस्त हो जाते थे और अंचलाधिकारी को अलग-अलग थानों तक पहुंचने में दिक्कत आती थी. नतीजतन, बैठकें नियमित रूप से नहीं हो पाती थीं और आम लोग घंटों इंतजार कर लौट जाते थे.
नई व्यवस्था में अब अंचल स्तर पर ही बैठक होगी. इसमें थानाध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि, राजस्व अधिकारी और हल्का कर्मचारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे. अगर किसी मामले में स्थल निरीक्षण की जरूरत होगी तो थाना और अंचल अधिकारी मिलकर उसका जायजा लेंगे.

जिला स्तर पर स्थिति

जिले के बेला और मिठनपुरा थाना क्षेत्र में कुल 10 भूमि विवाद के मामले अभी भी लंबित हैं, जिनमें से किसी का भी निष्पादन नहीं हो पाया है. वहीं, करजा अंचल ने 203 मामलों का शत-प्रतिशत निपटान कर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है.
सबसे अधिक विवाद साहेबगंज थाना क्षेत्र में सामने आए हैं, जहां अब तक 462 आवेदन दर्ज किए गए हैं. विभाग का लक्ष्य है कि इस नई व्यवस्था से सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के साथ निपटाया जाए और जनता को राहत मिले.

प्रशासन की सख्ती और जनता की उम्मीद

अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी जिलों के समाहर्ताओं को निर्देशित किया है कि इस नई व्यवस्था का पालन सख्ती से हो. साथ ही, राजस्व विभाग इन बैठकों की मॉनिटरिंग करेगा और जरूरत पड़ने पर सुधार भी करेगा.
लोगों की उम्मीद है कि इस पहल से जमीन से जुड़े विवादों का समाधान समय पर होगा और अनावश्यक तनाव कम होगा.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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