कैंपस में जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल पर होगी कार्रवाई

Updated at : 29 May 2024 8:10 PM (IST)
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कैंपस में जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल पर होगी कार्रवाई

पटना यूनिवर्सिटी में छात्र की हत्या के मामले पर यूजीसी भी नजर रख रही है. यूजीसी ने इस घटना को देखते हुए कहा है कि कैंपस में छात्र को जातिसूचक शब्दों से पुकारने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

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संवाददाता, पटना

पटना यूनिवर्सिटी में छात्र की हत्या के मामले पर यूजीसी भी नजर रख रही है. यूजीसी ने इस घटना को देखते हुए कहा है कि कैंपस में छात्र को जातिसूचक शब्दों से पुकारने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी. किसी भी विश्वविद्यालय कैंपस में जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी. अनारक्षित के साथ-साथ आरक्षित श्रेणी के छात्रों पर कटाक्ष करने की शिकायतों पर तुरंत मामला दर्ज होगा. इन मामलों में एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी. यूजीसी ने सभी विवि को निर्देश जारी कर दिया है. निर्देश जारी कर कहा है कि यूनिवर्सिटी अपने कैंपस में इस पर निगरानी रखें. कोई भी मामला सामने आने पर कार्रवाई करने के साथ उनकी सूचना भी देनी होगी. उच्च शिक्षण संस्थानों को इससे संबंधित मामलों की शिकायत, कार्रवाई समेत अन्य जानकारियां 31 जुलाई तक यूजीसी को भी भेजनी होगी. पटना यूनिवर्सिटी में हर्ष राज की हत्या के बाद यूजीसी ने इस दिशा में सख्त कदम उठाया है. यूजीसी के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी की ओर से इस संबंध में सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र भी लिखा गया है. सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर इसकी जानकारी भी देनी होगी. यूजीसी ने सभी मामलों पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है, ताकि पीड़ित बिना किसी डर के अपनी शिकायत भेज सके. इसमें छात्र, शिक्षक और कर्मियों समेत विवि या कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों की भी शिकायत की जा सकती है.

शिक्षक प्रताड़ित न करने का देंगे शपथपत्र

यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को शपथपत्र लेना होगा कि कोई भी शिक्षक कैंपस में जातिसूचतक शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे. वे इस वर्ग के किसी भी छात्र को कटाक्ष या परेशान नहीं करेंगे. यदि कोई शिकायत आती है तो उच्च शिक्षण संस्थानों को उच्चस्तरीय समिति के समक्ष इस मामले को लाकर उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की रिपोर्ट देनी होगी. इस समिति में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के सदस्य भी होंगे. उच्च शिक्षण संस्थानों को इस पूरे मामले का फॉलोअप लेना होगा. इसके साथ शिकायतों की जानकारी यूजीसी को भी देनी पड़ेगी.

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