Bihar Bhumi: पटना में दाखिल-खारिज पर DM सख्त, आज शाम तक निपटारा नहीं हुआ तो CO पर गिरेगी गाज

Action will be taken against the CO
Bihar Bhumi: जमीन से जुड़े कामों में महीनों की देरी झेल रहे लोगों के लिए यह बड़ी खबर है. पटना जिले में दाखिल-खारिज के लंबित मामलों को लेकर जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है.
Bihar Bhumi: पटना जिले में दाखिल-खारिज के 17 हजार से अधिक मामले लंबित होने पर जिला प्रशासन ने कड़ा अल्टीमेटम दिया है. अपर समाहर्ता राजस्व के अनुसार जिले में कुल 17,242 दाखिल-खारिज मामले पेंडिंग हैं. इनमें से सैकड़ों मामले तय समय-सीमा से कई गुना ज्यादा समय से लटके हुए हैं.
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि बुधवार शाम तक इन मामलों का काम नहीं हुआ तो संबंधित अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
महीनों से अटके मामले, तय समय-सीमा की उड़ रही धज्जियां
नियम के मुताबिक दाखिल-खारिज के मामलों का निपटारा 35 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन पटना जिले में हालात इससे बिल्कुल उलट हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3278 मामले 35 दिनों से अधिक, 1122 मामले 75 दिनों से ज्यादा और 731 मामले चार महीने यानी 120 दिनों से भी अधिक समय से लंबित हैं. इस देरी का सीधा असर जमीन खरीद-बिक्री, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों पर पड़ रहा है.
पटना जिले के छह अंचलों में एक हजार से ज्यादा दाखिल-खारिज के मामले लंबित हैं. फुलवारीशरीफ सबसे ऊपर है, जहां 1897 मामले पेंडिंग हैं. इसके बाद बिहटा में 1749, संपतचक में 1737, दीदारगंज में 1342, नौबतपुर में 1254 और मनेर में 1099 मामले लंबित हैं. प्रशासन का मानना है कि इन अंचलों में कामकाज की रफ्तार बेहद धीमी है, जिस पर तत्काल सुधार की जरूरत है.
परिमार्जन के मामलों ने भी बढ़ाई परेशानी
सिर्फ दाखिल-खारिज ही नहीं, बल्कि परिमार्जन के मामलों में भी पटना जिला पिछड़ा हुआ है. जिले में कुल 9163 परिमार्जन के मामले लंबित हैं. धनरूआ, फुलवारीशरीफ, बिहटा, नौबतपुर, संपतचक और दानापुर जैसे अंचलों में सबसे ज्यादा केस अटके हुए हैं.
लंबे समय से पेंडिंग मामलों ने आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.
छुट्टियां रद्द, जवाबदेही तय
जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित सीओ और राजस्व कर्मचारियों की छुट्टियां 31 दिसंबर तक रद्द कर दी हैं. डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी डीसीएलआर को निर्देश दिया है कि वे दाखिल-खारिज, परिमार्जन, नापीवाद और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों का संपूर्ण ब्योरा लेकर समीक्षा रिपोर्ट सौंपें. इस रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
जमीन से जुड़े मामलों में देरी लंबे समय से लोगों की बड़ी शिकायत रही है. अब प्रशासन के इस सख्त रुख से उम्मीद जगी है कि लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी. हालांकि असली परीक्षा यह होगी कि यह सख्ती कितने दिन तक कायम रहती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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