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नीतीश ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता दिये जाने की मांग दोहरायी

Updated at : 28 May 2017 11:03 PM (IST)
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नीतीश ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता दिये जाने की मांग दोहरायी

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता दिये जाने की मांग दोहरायी है. प्रधानमंत्री को कल लिखे अपने पत्र में नीतीश ने कहा कि अपनी उक्त मांग को पत्रों के माध्यम से अथवा अंतरराज्यीय परिषद एवं नीति आयोग की विभिन्न बैठकों […]

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष सहायता दिये जाने की मांग दोहरायी है. प्रधानमंत्री को कल लिखे अपने पत्र में नीतीश ने कहा कि अपनी उक्त मांग को पत्रों के माध्यम से अथवा अंतरराज्यीय परिषद एवं नीति आयोग की विभिन्न बैठकों में केंद्र सरकार के समक्ष रखा है.

उन्होंने कहा है कि देश की आजादी के बाद विकास के दृष्टिकोण से राज्यों के अनुभव में काफी भिन्नता रही है. जहां कई राज्यों को तेजी से विकास हुआ है, वहीं कई अन्य राज्य अभाव से ग्रसित रहे हैं. योजना आयोग और वित्त आयोग के वित्तीय हस्तांतरण भी राज्यों के बीच के इस अंतर को पाटने में असफल रहे हैं.

नीतीश ने कहा कि बिहार जैसे राज्यों को इसका भारी खमियाजा भुगतना पड़ा है. केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अनुदानों का सार्वाधिक लाभ विकसित राज्यों को ही मिला है. इस कारण से क्षेत्रीय असंतुलन को बढावा मिला है तथा देश के विकास में टापू सृजित हो गये हैं.

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह चिन्ता का विषय है कि राज्यों के बीच निधि के बंटवारा के लिए 14वें वित्त आयोग ने जो फार्मूला दिया है उसके आधार पर कुल राशि में बिहार का हिस्सा 10.9 प्रतिशत से घटकर 9.7 प्रतिशत हो गया है. वित्त आयोग ने क्षेत्रफल तथा प्राकृतिक वनों की अधिकता को अधिमानता दी है जबकि बिहार जैसे अधिक जनसंख्या धनत्व एवं थलरुद्ध राज्य की विशिष्ट समस्याओं की अनदेखी की है.

नीतीश ने कहा कि बिहार द्वारा हरित आवरण को बढाये जाने के प्रयास को प्रोत्साहित करने के बजाय उसकी उपेक्षा की गई है. इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष नेपाल से आने वाली नदियों में आने वाली बाढ से जान एवं माल की व्यापक क्ष्ति भी राज्य पर वित्तीय बोझ डालती है. बिहार भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना की दृष्टि से अत्यंत पिछडा है और यहां की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. बिहार राज्य की इन विशेष आवश्यकताओं को भी देखें जाने की जरुरत है.

नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि 14वें वित्त आयोग द्वारा राज्यों को अन्तरित किये जाने वाले हिस्से को 32 प्रतिशत से बढाकर 42 प्रतिशत किये जाने की अनुशंसा को आधार बनाते हुए केंद्रीय बजट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों को दी जाने वाली राशि में काफी कमी की गई है जिसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार पर बहुत अधिक पडा है.

उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के विरुद्ध अगर वास्तविक प्राप्ति को देखा जाये तो कर अन्तरण के तहत अनुशंसित राशि के विरुद्ध काफी कम राशि राज्य को प्राप्त हो रही है. वर्ष 2015-16 में यह कमी लगभग 7 हजार 400 करोड़ रुपये की थी और वर्ष 2016-17 में लगभग 6 हजार करोड़ रुपये की.

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