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प्रभात खबर राष्ट्रीय संगोष्ठी- ‘गांधी की राह, देश की जरूरत’ में बोले नीतीश, कहा-घर-घर पहुंचाएंगे गांधी के विचार

Updated at : 23 May 2017 3:27 PM (IST)
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प्रभात खबर राष्ट्रीय संगोष्ठी- ‘गांधी की राह, देश की जरूरत’ में बोले नीतीश, कहा-घर-घर पहुंचाएंगे गांधी के विचार

पटना : गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी के उपलक्ष्य में मंगलवार को प्रभात खबर की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबोधित किया. सीएम नीतीश ने अपने संबोधन में गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह की चर्चा करते हुए प्रभात खबर को इस आयोजन के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद दिया. मुख्यमंत्री ने आने […]

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पटना : गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी के उपलक्ष्य में मंगलवार को प्रभात खबर की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संबोधित किया. सीएम नीतीश ने अपने संबोधन में गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह की चर्चा करते हुए प्रभात खबर को इस आयोजन के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद दिया. मुख्यमंत्री ने आने वाले दिनों में बिहार के स्कूलों में गांधीजी की पचास कहानियों के संकलन को पढ़ाये जाने की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार सरकार उसकी तैयारी में जुटी है और बहुत जल्द स्कूलों में गांधी जी के विचारों से जुड़ी पचास कहानियों को स्कूलों में भिजवाया जायेगा. इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया और प्रभात खबर द्वारा किये गये इस आयोजन की महता पर प्रकाश डाला. उन्होंने गांधी को नमन करते हुए लोगों को धन्यवाद दिया.

‘गांधी की राह, देश की जरूरत’

गांधी की राह, देश की जरूरत विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी के परपोते व लेखक तुषार गांधी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी बात रखते हुए देश की कई ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा की. तुषार गांधी ने यह भी कहा कि आज भी चंपारण और मोतिहारी के किसान सरकार से गुहार लगा रहे हैं. आज भी वह अपनी हक की आवाज उठा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी का सफल प्रयोग कर इन्होंने दिखा दिया है कि सामाजिक बदलाव किसे कहते हैं. तुषार गांधी ने संबोधन की शुरुआत में कहा कि गांधी मार्ग बिल्कुल आसान नहीं है. इसलिए ज्यादातर आजकल गांधी की भक्ति की जाती है, क्योंकि वह आसान है. उस मार्ग पर चलना कठिन है, इसलिए उस मार्ग पर चलने की ताकत बहुत कम लोगों में होती है. गांधी के मार्ग पर चलने के लिए शेर का जिगर चाहिए, 56 इंच की छाती से वह मार्ग आसान नहीं होता. काम करने के लिए बोलना नहीं पड़ता. काम स्वयं बोलता है. संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय ने कहा कि लोगों की तरह, लोगों के साथ चीजें देख सकने की खूबी महात्मा को महात्मा बनाती है.

नीतीश ने क्या कहा, देखें वीडियो


नीतीश कुमार ने भी किया संबोधित

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य की पहलसे चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरा होने के उपरांत अनेक कार्यक्रमों के आयोजन कियागयाऔर किया जा रहा है. सभी दलों के गांधीवादी विचारकोंऔर उनकी रायसे पूरे सालइसकीस्मृति में आयोजन की रूपरेखा तैयार हुई और 10 और 11 अप्रैल को गांधी विचार का आयोजन किया गया. देशभर से विचारक आये. जितनी तनमयता के साथ युवा पीढ़ी ने इस आयोजन में भाग लिया और उपस्थित रही,वह काबिले तारीफ है. राष्ट्रीय विमर्श में युवा भारी संख्या में शामिल हुए. गांधी जी 10 अप्रैल को ही पटना आये थे. दक्षिण अफ्रिका में जो उन्होंने झेला, रंगभेद के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया. चंपारण आने के बाद गोखले के सुझाव पर पूरे देश में घूमते रहे. नीतीश ने कहा कि 1917 में पधारे तो एहसास हुआ कि कैसा हमारा समाज है. राजकुमार शुक्ल उनके पीछे पड़े थे. सब जगह उनके पास रहे. जैसा उन्होंने वचन दिया और आये यहां पर. उन्होंने कहा कि यहां से राजेंद्र बाबू के घर परगये.वहांराजेंद्र बाबू नहीं थे,वह पूरी गये थे. राजेंद्र के घर पर जो गांधी जी के साथ उनके नौकरों ने व्यवहार किया वह आश्चर्यजनकथा.

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गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जायेगा-सीएम

नीतीश कुमार ने चंपारण सत्याग्रह की चर्चा करते हुए वर्तमान संदर्भों और घटनाओं पर भी बहुत सारी बातें की. उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल को ही मुजफ्फरपुर पहुंचे, चार दिन रहे. गांधीजी को मोतिहारी पहुंचे. 18 अप्रैल को जो उन्होंने कोर्ट में पक्ष रखा वह ऐतिहासिक है. सत्याग्रह का मतलब है कि गलत को नहीं मानेंगे. सजा भुगतने के लिये तैयार रहेंगे. स्थानीय प्रशासकों की हालत पतली हो गयी. गांधी जी बेतिया गये. उन्होंने राजकुमार शुक्ल ने गांधी को चंपारण लाया. उनका घर उजाड़ दिया था. वहां गांधी जी गये थे. चंपारण सत्याग्रह ने आजादी की लड़ाई को गति दी. उससे पहले आजादी की लड़ाई ठीक से लड़ी नहीं जाती थी. चंपारण के बाद ही आजादी की लड़ाई में सत्याग्रह जुड़ा. सामाजिक रूप से अनुभव से समस्याओं का समाधान निकाला. सबका खाना एक साथ बनवाया.

राज्य सरकार आयोजित करवा रही है कई कार्यक्रम-नीतीश

उन्होंने कहा कि हमलोगों ने अनेक कार्यक्रम आयोजित करवाये. हमलोग गांधी जी के विचारों को घर-घर तक पहुंचाने का काम करने वाले हैं. घर-घर दस्तक का कार्यक्रम भी होने वाला है. उनके जीवन पर अधारित फिल्मों को दिखाया जा रहा है. रथ के जरिये एक-एक गांव में दिखाने की योजना है. कार्यक्रम चल रहा है. उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह का वातावरण बनता चला जा रहा है, आज समाज का. वैसी स्थिति में गांधीजी के विचार को जन-जन तक पहुंचानाजरूरीहै. आवश्यकता की पूर्ति होनी चाहिए लालच की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. आजकल पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ हो रहा है. नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में जो मानव श्रृखंला बनी, उसमें चार करोड़ लोगों ने हिस्सेदारी की. सीएम ने कार्यक्रम में आये बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और राजद अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को एकसाथ बैठे देखकर कहा कि यह गांधी जी कि ही देन है कि यह लोग एकसाथ बैठे हुए हैं.


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