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नीतीश कुमार का 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा मास्टर स्ट्रोक, पढ़ें

Updated at : 16 May 2017 8:30 AM (IST)
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नीतीश कुमार का 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा मास्टर स्ट्रोक, पढ़ें

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सियासत में सधे हुए कदम उठाने के लिए जाने जाते हैं. इसलिए, स्थानीय राजनीतिक जानकार उन्हें बिहार की राजनीति के चाणक्य तक कह डालते हैं. नीतीश कुमार ने सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में जिस तरह की घोषणा की है. उस घोषणा से […]

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सियासत में सधे हुए कदम उठाने के लिए जाने जाते हैं. इसलिए, स्थानीय राजनीतिक जानकार उन्हें बिहार की राजनीति के चाणक्य तक कह डालते हैं. नीतीश कुमार ने सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में जिस तरह की घोषणा की है. उस घोषणा से उनके राजनीतिक विरोधियों की बांछें खिल गयी हैं. वहीं दूसरी ओर, उनके वैसे समर्थक जो, उन्हें देश के सर्वोच्च पद पर देखने का सपना संजोये हुए हैं, उन्हें थोड़ी सी मायूसी हुई है. नीतीश कुमार ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पीएम उम्मीदवारी से अपने-आपको अलग करने का एलान किया है. सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित लोक संवाद कार्यक्रम के बाद पत्रकारों की ओर से प्रधानमंत्री पद के संबंध में पूछे गये एक सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि मुझे बिना कारण के निशाना बनाया जा रहा है. मैं 2019 में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नहीं हूं. हमारी छोटी सी पार्टी है. थोड़ा बहुत जनसेवा कर रहे हैं. चाहे पूर्व में संसद के सदस्य के रूप में हो, केंद्र में मंत्री के तौर पर, विधायक के रूप में हो अथवा राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर. जनता ने काम करने का जो भी अवसर दिया, हम वह काम करते रहे. हम उसके आगे कुछ नहीं सोचते.

मैं दौड़ में शामिल नहीं-नीतीश

उन्होंने कहा कि अभी तो महागठबंधन को बिहार की सेवा करने का जनादेश है. हम राजनीतिक व्यक्ति हैं. पार्टी में अध्यक्ष बना दिया गया. शरद जी तीन बार से अध्यक्ष थे, आगे रह ही नहीं सकते थे, तो हम बन गए. क्या इसका मतलब राष्ट्रीय आकांक्षा प्रधानमंत्री बनने का हो गया. भाजपा के विकल्प के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों का महागठबंधन बनने की संभावना की बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि होना तो चाहिए लेकिन, होगा या नहीं इसके बारे में हम कहने वाले कौन होते हैं. देश में कोई एक पार्टी थोड़े ही है, बिहार में तो तीन दलों का महागठबंधन बन गया, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों दल हैं, सब तैयार होंगे तो कुछ हो सकता है.

मैं ऐसा सोचने वालों को साधुवाद देता हूं-नीतीश

उन्होंने कहा कि कई विपक्षी दलों के नेताओं के यह कहने के बारे में पूछे जाने पर कि उनमें गैरभाजपा दलों का नेतृत्व करने की क्षमता है, नीतीश ने कहा कि ऐसा समझने वालों को मैं बड़ा साधुवाद देता हूं, ह्म्दय से धन्यवाद देता हूं, लेकिन हमारी कहीं से भी उस दिशा में आकांक्षा नहीं है. यह पूछे जाने पर कि पूर्व में आपने कहा था कि आप उस पद के लायक हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नहीं, हंसी मजाक कर सकते हैं लेकिन अगर संजीदगी के साथ पूछेंगे तो नहीं.

नीतीश की घोषणा का होगा दूरगामी असर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस घोषणा के बाद एनडीए के नेता कह रहे हैं कि 2024 तक पीएम पद की वैकेंसी नहीं, यह बात नीतीश कुमार को पता चल गयी है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार ने ऐसी बात तब कही है जब मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने वाले हैं और बिहार में महागठबंधन के बड़े नेता लालू प्रसाद मोदी को लोकसभा भंग करने की चुनौती दे रहे हैं. लालू ने आगामी 27 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में समान विचारधारा वाली पार्टियों की रैली बुलायी है. ऐसी स्थिति में नीतीश कुमार का पीएम पद की दौड़ से खुद को अलग करना एक बड़ा सवाल पैदा करता है. विशेषज्ञों की मानें तो नीतीश कुमार यह मानते हैं कि भाजपा विरोधियों को एक मंच पर लाना और एक दूसरे नेता के नेतृत्व में चुनाव लड़ना आसान नहीं है. नीतीश को पता है कि देश के सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों की महत्वाकांक्षा और उस राज्य की स्थिति अलग-अलग है. कुछ राज्य ऐसे हैं जिनके हितों की अनदेखी किसी भी फ्रंट के पीएम नहीं कर सकते.

नीतीश समझते हैं सारी बातें-विशेषज्ञ

नीतीश कुमार कांग्रेस के मूड को समझते हैं. उन्हें पता है कि बिहार चुनाव से पहले बनने वाले महागठबंधन का हश्र क्या हुआ था. जब मुलायम सिंह जैसे समाजवादी नेता भाग खड़े हुए और यूपी चुनाव में कांग्रेस ने नीतीश से बात करने की जगह अखिलेश के साथ जाना पसंद किया. नीतीश कुमार को यह भी पता है कि बाकी दलों को एकजुट कर दिल्ली पर कब्जा करने की बात दूर की कौड़ी है. इसलिए उन्होंने एक मास्टर स्ट्रोक खेल दिया और अपने-आपको पीएम पद की उम्मीदवारी से अलग बता दिया. महागठबंधन दल के पास फेस की भी मजबूरी है, यह बात नीतीश कुमार बखूबी जानते हैं. खैर, अभी लोकसभा चुनाव होने में दो साल बाकी हैं, देखना दिलचस्प होगा तब-तक कैसे-कैसे फ्रंट बनते हैं.

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