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शहाबुद्दीन को सीवान से तिहाड़ जेल भेजने के मामले में 15 को फैसला सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट

Updated at : 09 Dec 2016 7:17 AM (IST)
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शहाबुद्दीन को सीवान से तिहाड़ जेल भेजने के मामले में 15 को फैसला सुनायेगा सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली (ब्यूरो) : बिहार के पूर्व राजद सांसद और बाहुबलि नेता शहाबुद्दीन को पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड और तेजाब कांड समेत कई मामलों में सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट अब 15 दिसंबर को अपना फैसला सुनाएगा. फिलहाल, 15 दिसंबर तक अदालत ने फैसला अपने पास […]

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नयी दिल्ली (ब्यूरो) : बिहार के पूर्व राजद सांसद और बाहुबलि नेता शहाबुद्दीन को पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड और तेजाब कांड समेत कई मामलों में सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ्ट करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट अब 15 दिसंबर को अपना फैसला सुनाएगा. फिलहाल, 15 दिसंबर तक अदालत ने फैसला अपने पास सुरक्षित रख लिया है. इस मामले में बिहार सरकार, सीबीआई व शहाबुद्दीन की आेर से अदालत में दलील दी जा चुकी है. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा व न्यायाधीश अमिताव राय का पीठ 15 दिसंबर को आशा रंजन और चंदा बाबू की दायर याचिका पर फैसला सुनाएगा. शहाबुद्दीन पर 45 मामले दर्ज हैं और पत्रकार हत्याकांड की जांच बिहार सरकार ने सीबीआई से कराने की सिफारिश पहले ही कर चुकी है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायाधीश अमिताव राय की खंडपीठ के समक्ष सीबीआइ ने इस मामले में दलील देते हुए कहा था कि शहाबुद्दीन को तिहाड़ जेल हस्तांतरित करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है. आरोपी के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है. गौरतलब है कि मंगलवार को शहाबुद्दीन के वकील ने उन्हें तिहाड़ जेल भेजने का विरोध करते हुए कहा था कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार आरोपी को भी है.

बुधवार को सुनवाईके दौरान खंडपीठ ने कहा था कि आरोपी पक्ष की आेर से बार-बार निष्पक्ष सुनवाई की बात कही गयी है, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि आरोपी के साथ पीड़ित पक्ष के लिए निष्पक्ष सुनवाई काफी मायने रखती है. पीड़ित के साथ किसी प्रकार की नाइंसाफी को न्यायोचित नहीं माना जा सकता है. पीड़ित पक्ष को न्याय मिलना जरूरी है ताकि न्याय के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे.

सुनवाई के दौरान शहाबुद्दीन के वकील ने फिर कहा कि सभी मामले राजनीति से प्रेरित है और अगर आरोपी को बाहर के जेल में भेजा गया तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा. इस मामले में बिहार सरकार, सीबीआइ, शहाबुद्दीन और पीड़ित पक्ष अपनी दलील खंडपीठ के सामने रख चुके हैं और उम्मीद है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है.

मालूम हो कि पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में पत्नी आशा रंजन और तेजाब हत्याकांड चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा कर शहाबुद्दीन को सीवान जेल से स्थानांतरित करने की मांग की है. शहाबुद्दीन के जेल व उनके मुकदमों के हस्तांतरण को लेकर पहले ही बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि उसे इसमें कोई आपत्ति नहीं है.

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