चुनावी दंगल : अब नफा-नुकसान का गणित, सीटों के बंटवारे के साथ ही NDA का 185 प्लस मिशन शुरू

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Sep 2015 6:47 AM

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पटना : मतदान के पहले ही भाजपा को 58 सीटों का फायदा हो गया है. 2010 के चुनाव में भाजपा ने 102 सीट पर अपना उम्मीदवार दिया था, इस बार 160 सीट पर चुनाव लड़ेगी. पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा जदयू के साथ मिलकर लड़ी थी. कई जिले ऐसे भी थे जहां उसे एक सीट पर […]

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पटना : मतदान के पहले ही भाजपा को 58 सीटों का फायदा हो गया है. 2010 के चुनाव में भाजपा ने 102 सीट पर अपना उम्मीदवार दिया था, इस बार 160 सीट पर चुनाव लड़ेगी. पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा जदयू के साथ मिलकर लड़ी थी. कई जिले ऐसे भी थे जहां उसे एक सीट पर भी नहीं मिली थी और कई जिले में एकाध सीट. जिसके चलते वहां पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका. लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्व बिहार व कोसी व सीमांचल के इलाके में भारी असफलता मिली थी. पार्टी अपनी जीती हुई सीट हार गयी थी. पार्टी उस कसर को इस चुनाव में दूर कर लेना चाहती है.

भाजपा : मतदान के पहले ही भाजपा को 58 सीटों का फायदा
भाजपा ने 102 सीटों पर चुनाव लड़कर 91 पर सफलता हासिल की थी. पार्टी उन सभी सीटों पर अपना उम्मीदवार तो देगी ही, इसके अलावा वह 58 नयी सीटों पर भी अपने उम्मीदवार देगी.
इन सीटों में पूर्व बिहार की मुंगेर का मुंगेर सीट, जमुई का चकाई सीट के अलावा शेखपुरा जिले की एक सीट होगी. सीमांचल व कोसी में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र की कई सीटों पर भाजपा अपना उम्मीदवार देगी. भाजपा के सहयोगी रालोसपा, लोजपा व हम कोसी तथा सीमांचल के इलाके में बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है इसलिए पार्टी को यहां उम्मीदवार देने में कोई परेशानी नहीं होगी. उत्तर बिहार में भी पार्टी अपने उम्मीदवारों की संख्या बढ़ायेगी. भाजपा की नजर मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा पर है.
बिहार शरीफ व इस्लामपुर के जदयू विधायक पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं. सिर्फ राजगीर में भाजपा के विधायक हैं. मगध व शाहाबाद रेंज में भी भाजपा अपना अधिक उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाएगी.
लोजपा : वर्ष 2010 के मुकाबले लोजपा को 35 कम सीटें
पटना : लोजपा को इस बार 2010 विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 35 सीटें कम मिली हैं. 2010 विधानसभा चुनाव में लोजपा का राजद के साथ चुनावी समझौता था. उसे 75 सीटें मिली थी. 75 में मात्र तीन सीटों पर वह जीत पायी थी. लेकिन, 42 सीटों पर लोजपा दूसरे स्थान पर रही थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में सात सीटों पर खड़ी लोजपा के उम्मीदवार 36 विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहे थे.
बटवारे का फार्मूला यदि लोकसभा चुनाव आधार बना होग तो लोजपा फिर भी चार सीटों के फायदे में दिख रही हैं. इधर, सीटों को लेकर दल के भीतर गहमा गहमी बनी हुई है. पार्टी के समक्ष अपनों के अलावा सांसदों के नाते रिश्तेदारों को उम्मीदवार बनाने की चुनौती है. पासवान के दो दामाद, रामचंद्र पासवान के बेटे भी उम्मीदवार बनने को बेताब हैं.
चालीस सीटों में पार्टी को अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को भी टिकट देने की चुनौती है. चार दिनों के कशमकश के बाद ऐसा लगा था कि लोजपा को सम्मानजनक सीटें मिल पायेगी. हालांकि एनडीए के भीतर भाजपा के बाद सबसे अधिक सीटें लोजपा को ही मिली है. सूत्र बतातें हैं कि हम को मिली तरजीह से लोजपा खुश नहीं है.
रालोसपा : रालोसपा को 67 सीटों के मुकाबले मिलीं 23 सीटें
रालोसपा ने एनडीए से विधानसभा की 67 सीटें मांगी थी. लेकिन बंटवारे में उसे महज 23 सीटें ही मिल पायी. लोकसभा चुनाव में रालोसपा के तीन उम्मीदवार थे और तीनों ही सीटों पर उसे जीत हासिल हुई थी़
18 विधानसभा क्षेत्रों में वह पहले स्थान पर रही थी. पार्टी ने इस बीच अपना दायरा भी बढाया. दूसरे प्रमुख दलों के नेताओं ने रालोसपा का दामन थामा. पार्टी को उम्मीद थी कि उसे कम से कम चालीस सीटें मिल जायेंगी. मध्य बिहर की प्रमुख कोइरी, कुशवाहा और अगड़ी जातियों में भी उसके आधार वोट तैयार हो रहे थे.
कुशवाहा वोटरों की गोलबंदी को आधार बना कर रालोसपा की उम्मीद थी कि उसे अधिक सीटें मिल पायेंगी. अब पार्टी के समक्ष इन्ही 23 सीटों में अपने बेस वोट को बांधे रखने की चुनौती होगी . साथ ही सामाजिक समीकरण में दूसरी जातियों के उम्मीदवारों को भी उम्मीदवार बनाने की समस्या से उसे रू-ब-रू होना पड़ेगा. रालोसपा ने अपनी कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया था.
इसके बाद से ही पार्टी लगातार सीटों को लेकर दवाब बना रही थी. हालांकि सीट बटवारे के आखिरी क्षणों में उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिख कर खुद ही न्यायोचित बटवारे की सलाह दी थी. विधानसभा चुनाव के पहले हुए विधान परिषद की 24 सीटों के चुनाव में भी रालोसपा को दो ही सीट दिये गये थे.
हम : 20 सीटों पर हम का प्रत्याशी पांच को भाजपा से टिकट
बिहार विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानी अवामी मोरचा सेकुलर (हम) 20 प्रत्याशियों को मैदान में उतारेगा, जबकि हम के पांच नेताओं को भाजपा अपने में शामिल करा कर टिकट देगी. जदयू के बागी 12 और एक निर्दलीय विधायक हम व भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरेंगे.
भाजपा से लड़ेंगे नीतीश मिश्रा
एनडीए में सीट शेयरिंग के बाद पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा को झंझारपुर से, राजू सिंह को साहेबगंज से, अजय प्रताप को जमुई से, पूनम देवी को दीघा से और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी को पार्टी में शामिल कर भाजपा टिकट देगी.
वहीं, जदयू के अन्य बागी विधायक और विधान पार्षद जो मांझी खेमे में हैं उन्हें हिंदुस्तानी अवामी मोरचा की ओर से टिकट दिया जायेगा. इसमें खुद जीतन राम मांझी मखदुमपुर और इमामगंज सीट से लड़ेंगे. वहीं, पूर्व मंत्री वृशिण पटेल को वैशाली से, सुमित कुमार सिंह चकाई से, अजीत कुमार कांटी से, राहुल शर्मा घोसी से, रवींद्र राय महुआ से, पूर्व मंत्री विनय बिहारी लौरिया से, पूर्व मंत्री शाहीद अली खान सुरसंड से, पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी परबत्ता से, हम केप्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी तारापुर से और छातापुर से नीरज कुमार सिंह हिंदुस्तानी अवामी मोरचा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. इसके
अलावा तरारी, शेखपुरा, बेला, दिनारा, वारिसनगर समेत तीन अन्य विधानसभा सीट से भी हम अपना उम्मीदवार उतारेगा. इन सभी सीटों का औपचारिक एलान अगले एक दो दिन में हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी कर सकते हैं.
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