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बिहार चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों के स्थानांतरण के दिये आदेश

Updated at : 29 Aug 2015 4:40 PM (IST)
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बिहार चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों के स्थानांतरण के दिये आदेश

नयी दिल्ली: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराने के संदर्भ में अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश दिये हैं जो या तो अपने गृह जिले में तैनात हैं या लंबे समय से कार्यरत हैं. आयोग की यह पहल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है. बिहार […]

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नयी दिल्ली: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराने के संदर्भ में अधिकारियों के स्थानांतरण के आदेश दिये हैं जो या तो अपने गृह जिले में तैनात हैं या लंबे समय से कार्यरत हैं. आयोग की यह पहल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है. बिहार के प्रधान सचिव और मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखे पत्र में आयोग ने हालांकि स्पष्ट किया कि स्थानांतरण पोस्टिंग का आदेश सेक्टर अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जबकि वे चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े हैं.

चुनाव आयोग ने कहा कि उसने यह फैसला किया है कि चुनावों से सीधे जुड़े प्रशासनिक या पुलिस सेवा के किसी अधिकारी को इस स्थिति में वर्तमान पोस्टिंग वाले जिले में काम करना जारी रहने की अनुमति नहीं दी जायेगी कि अगर वह पिछले चार साल में से तीन साल से अपने गृह जिले में कार्यरत हो अथवा वह 30 नवंबर 2015 तक या उससे पहले तीन वर्ष एक जगह तैनात हो. गौर हो कि वर्तमान बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को पूरा हो रहा है.

आयोग ने हालांकि चेताया, अगर चुनाव से परोक्ष रुप से जुड़े किसी अधिकारी के संदर्भ में प्रथम दृष्टया शिकायत प्राप्त होती है तब आयोग ऐसे अधिकारियों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करेगा. चुनाव आयोग ने हालांकि स्पष्ट किया कि सेक्टर अधिकारी के रुप में नियुक्त अधिकारी, जबकि वे चुनाव कार्य से जुड़े होते हैं, वे इन निर्देशों के दायरे में नहीं आयेंगे क्योंकि उनका काम फील्ड ड्यूटी के रुप में है और जहां उस क्षेत्र या भौगोलिक जानकरी उनके प्रभावी कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है.

उसने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी चुनाव के दौरान ऐसे अधिकारियों पर करीबी नजर रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका कामकाज पूरी तरह से निष्पक्ष हो. आयोग ने अतीत में कट आफ तिथियों का कुछ राज्यों द्वारा पूरी तरह से पालन नहीं करने का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकारों को तीन वर्ष की अवधि का आकलन सख्ती से करना चाहिये.

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