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बाधा है, पर मन चंगा तो कठौती में गंगा : लालू

Updated at : 12 May 2015 6:27 AM (IST)
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बाधा है, पर मन चंगा तो कठौती में गंगा : लालू

पटना : सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि जनता परिवार के विलय में तकनीकी बाधा है. लेकिन, उन्होंने कहा कि अगर मन चंगा, तो कठौती में गंगा. बिना विलय के भी गंठबंधन कर राजद-जदयू ने बीजेपी का नाम मिटाने का काम किया है. अगर विलय में […]

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पटना : सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि जनता परिवार के विलय में तकनीकी बाधा है. लेकिन, उन्होंने कहा कि अगर मन चंगा, तो कठौती में गंगा. बिना विलय के भी गंठबंधन कर राजद-जदयू ने बीजेपी का नाम मिटाने का काम किया है. अगर विलय में किसी तरह की तकनीकी अड़चन है, तो इसको लेकर बीजेपी को ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए.

हम सभी इस पर बात करेंगे कि इसे कैसे आगे बढ़ाना है, उस दिशा में काम किया जायेगा. सोमवार की दोपहर दिल्ली से पटना पहुंच लालू प्रसाद ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि तकनीकी बातों पर सहमत-असहमत होने की बात नहीं है. विधानसभा चुनाव में समय कम बचा है. अब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पतन शुरू हो गया है. एक साल में नरेंद्र मोदी ने कोई काम नहीं किया.उन्होंने कहा कि अगर विलय होता है और तकनीकी पक्ष को ध्यान में नहीं रखा गया, तो पार्टी का सिंबल फ्रिज हो जायेगा और संपत्ति भी चली जायेगी.

समाजवादी पार्टी, राजद और जदयू क्षेत्रीय दल हैं. अगर सपा का चुनाव चिह्न् साइकिल की मांग की जाती है, तो दूसरे दल भी उस पर दावा कर सकते हैं. चंद्रबाबू नायडू और पैंथर्स पार्टी के भीम सिंह का चुनाव चिह्न् भी साइकिल ही है. ऐसे में दलों के विलय के बाद उसी सिंबल पर कोई डमी कैंडिडेट किसी भी क्षेत्र से खड़ा कर सकता है. इसके कारण पुरानी पार्टियों को परेशानी हो सकती है. अभी चुनाव के समय में बहुत से कैंडिडेट घूमते चल रहे हैं. उनको किसी भी दल से चुनाव लड़ने के लिए टिकट चाहिए.

राजद प्रमुख ने कहा कि विधान परिषद चुनाव को लेकर राजद-जदयू के बीच बात हो गयी है. कांग्रेस से इस संबंध में कोई बात नहीं हुई है. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक करने को लेकर बेवजह हवा उड़ा दी गयी कि राजद को नजरअंदाज किया गया है. अगर जदयू द्वारा बैठक में राजद के किसी नेता को बुला लिया जाता, तो यह मीडिया को यह मौका ही नहीं मिलता. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी सीटिंग सीट का मसला नहीं है. अभी राजनीतिक परिस्थिति भी बदली है.

जीतन राम मांझी को लेकर पूछे गये सवाल पर लालू प्रसाद ने कहा कि मांझी सहित भाजपा की जितनी विरोधी शक्तियां हैं, अगर वह हमारे साथ आना चाहती है, तो उनका स्वागत है. आखिर बिहार में भाजपा को हटाने के लिए ही तो बिना हिंग-फिटकिरी के सरकार को समर्थन दिया गया. बीजेपी को हटाने के लिए सबका स्वागत है. बीजेपी एंटी ताकतों को इकट्ठा भी होना चाहिए, जिससे वोटों का विखराव नहीं हो.

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