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नीतीश से कोई वैचारिक मतभेद नहीं: मांझी

Updated at : 30 Jan 2015 6:21 AM (IST)
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नीतीश से कोई वैचारिक मतभेद नहीं: मांझी

औरंगाबाद: मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी मे कहा कि नीतीश कुमार से हमारा कोई वैचारिक मतभेद नहीं है. जिस दिन नीतीश को मुख्यमंत्री बनने की इच्छा होगी, उस दिन जीतनराम मांझी पहला व्यक्ति होगा, जो उनके नाम का प्रस्ताव रखेगा. वे गुरुवार को दाउदनगर के परेड ग्राउंड में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. वह दाउदनगर अनुमंडलीय […]

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औरंगाबाद: मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी मे कहा कि नीतीश कुमार से हमारा कोई वैचारिक मतभेद नहीं है. जिस दिन नीतीश को मुख्यमंत्री बनने की इच्छा होगी, उस दिन जीतनराम मांझी पहला व्यक्ति होगा, जो उनके नाम का प्रस्ताव रखेगा. वे गुरुवार को दाउदनगर के परेड ग्राउंड में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. वह दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल का उद्घाटन करने औरंगाबाद पहुंचे थे.

सीएम मांझी ने कहा कि वह आज भी नीतीश कुमार के कार्यो को ही आगे बढ़ा रहे हैं. लेकिन, सोचने की बात तो यह है कि ऐसा क्या हुआ कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. लोकसभा चुनाव में उन्हें एक बड़ा झटका लगा. किसी को विश्वास नहीं था कि सिर्फ एक-दो सीटें ही जीतेंगे. उन्होंने नैतिकता का परिचय देते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. मांझी ने कहा कि आज भाई-भतीजावाद व जात-पात का जमाना है. वह मजदूर, भुइयां-मुसहर के लड़के हैं, जिसे नीतीश ने सीएम बना दिया. उनका यह निर्णय अनमोल था. यही कारण है कि वह उनके अधूरे कार्यो को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन मीडिया सुर्खियों में रहने के लिए कहता है कि यह रस्साकशी है. ऐसे अफवाहों से दूर रहना है और सूबे को विकास के पथ पर बढ़ाना है.

केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीएम ने कहा कि चुनाव के समय कहा गया था कि कालाधन वापस लायेंगे. गलत प्रचार के बल पर वह केंद्र में काबिज हो गये और अब बिहार में भी सत्ता हथियाने की कोशिश में लगे हैं. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद व नीतीश कुमार का प्रयास है कि ऐसी शक्तियों को रोका जाये. इसमें हमलोग काफी सफल रहे हैं.

फिर बांटी जा रही पैसे की हुंडी

भाजपा का नाम लिये बगैर मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी से ही पैसे की हुंडी बांटी जा रही है. कोई कोढ़िया की सेवा कर रहा है, तो कोई झोपड़ी में जाकर उनको पोट रहा है. शराब भी बांटी जा रही है.

सुधर जायें डॉक्टर

मुख्यमंत्री ने सरकारी डॉक्टरों को सुधर जाने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि पीएमसीएच में भी कुछ हुड़दंगी चिकित्सक थे. उनको घर बैठा दिया, तो लोग कहने लगे कि जीतनराम मांझी ने कड़ा एक्शन लिया. मैं जानता हूं कि गरीब का बेटा कम पढ़ता है और बहुत कम ही डॉक्टर बन पाते हैं. बड़े घर के बच्चे मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बन जाते हैं और वे अपने काम पर ध्यान नहीं देते. फिर दलित बने मुख्यमंत्री मांझी ने कहा कि लोगों की चाहत है कि विधानसभा चुनाव के बाद दलित वर्ग से ही नया सीएम हो.

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