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बाढ़ अस्पताल में नहीं होती है सजर्री

बाढ़: अनुमंडलीय अस्पताल में प्रति माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन भरोसेमंद चिकित्सा मृग मरीचिका बन कर रह गयी है. अस्पताल में आइसीयू के लिए तीन ऑक्सीजन सिलिंडर, एसी व स्ट्रेचर रोगी कल्याण समिति द्वारा करीब तीन लाख रुपये की लागत से खरीदी गयी है. विडंबना यह है कि अब इस यूनिट को […]

बाढ़: अनुमंडलीय अस्पताल में प्रति माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन भरोसेमंद चिकित्सा मृग मरीचिका बन कर रह गयी है. अस्पताल में आइसीयू के लिए तीन ऑक्सीजन सिलिंडर, एसी व स्ट्रेचर रोगी कल्याण समिति द्वारा करीब तीन लाख रुपये की लागत से खरीदी गयी है. विडंबना यह है कि अब इस यूनिट को ही भरोसेमंद उपचार की जरूरत है. इसकी एसी का उपयोग चिकित्सक कक्ष में हो रहा है.

एक्स-रे मशीन जजर्र
एक्स-रे मशीन भी पुरानी हो चुकी है. लिहाजा कब यह ठप हो जाये कहा नहीं जा सकता. अस्पताल में दवा के नाम पर खांसी व बुखार की दवा है. एंटीबायोटिक की हमेशा किल्लत रहती है. लिहाजा मरीज बाहर से दवा खरीदने को विवश हैं. ऑपरेशन थियेटर की हालत यह है कि इसका उपयोग बंध्याकरण के दौरान होता है. कई वर्षो तक चिकित्सक इसे विश्रम कक्ष के रूप में इस्तेमाल करते थे. कई उपकरण व स्ट्रेचर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं.

पैथोलॉजी जांच केंद्र बंद
पैथोलॉजी जांच केंद्र डेढ़ वर्ष पूर्व ही बिल भुगतान नहीं होने के कारण एजेंसी द्वारा बंद कर दिया गया है. लिहाजा मरीजों को बाहर के जांच घरों में जाना पड़ता है. अस्पताल में सबसे बदहाल स्थिति प्रसव वार्ड की है. गर्भवती महिलाएं यहां रामभरोसे दाखिल की जाती हैं. सजर्री की सुविधा नहीं होने के कारण डॉक्टर पीएमसीएच रेफर कर देते हैं.

गत दिन अस्पताल में प्रवेश द्वार की सीढ़ी पर प्रसव वेदना से व्याकुल महिला बैठी थी. परिजन अस्पताल के कर्मियों की चिरौरी में लगे थे कि उसे जल्दी वार्ड में एडमिट किया जाये, लेकिन कर्मियों में इस बात की बहस हो रही थी कि यदि अभी चुनाव हो जाये, तो किसकी सरकार बनेगी. उसे एक घंटे के बाद वार्ड में एडमिट किया गया, यदि इसी बीच कुछ हो जाता , तो उसका जिम्मेदार कौन होता.

12 चिकित्सक तैनात
अस्पताल में 12 चिकित्सक तैनात हैं , लेकिन ओपीडी में निर्देश के बावजूद सभी चिकित्सकों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभारी बना दिया गया है. बहरहाल नाम बड़े और दर्शन छोटे के तर्ज पर अनुमंडल अस्पताल काम कर रहा है. यहां आनेवाले मरीजों को दवा से ज्यादा दुआ की जरूरत पड़ती है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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