पटना सिटी : खाली पड़े हैं अफसरों के पद, कामकाज पर पड़ रहा असर
Updated at : 21 Feb 2020 8:53 AM (IST)
विज्ञापन

अमिताभ श्रीवास्तव पटना सिटी : अनुमंडल कार्यालय में चार कार्यपालक दंडाधिकारियों के पद तो सृजित हैं, लेकिन महज एक कार्यपालक दंडाधिकारी के सहारे कामकाज हो रहा है. कुछ इसी तरह की स्थिति बनी है इन दिनों पटना सिटी अनुमंडल की. स्थिति यह है कि अधिकारियों की कमी के कारण कामकाज पर इसका प्रतिकूल असर पड़ […]
विज्ञापन
अमिताभ श्रीवास्तव
पटना सिटी : अनुमंडल कार्यालय में चार कार्यपालक दंडाधिकारियों के पद तो सृजित हैं, लेकिन महज एक कार्यपालक दंडाधिकारी के सहारे कामकाज हो रहा है. कुछ इसी तरह की स्थिति बनी है इन दिनों पटना सिटी अनुमंडल की. स्थिति यह है कि अधिकारियों की कमी के कारण कामकाज पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है. हालांकि इस मामले में एसडीओ राजेश रौशन का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर कार्य का निष्पादन करते हैं.
किन-किन अधिकारियों के पद हैं रिक्त : अनुमंडल कार्यालय में कार्यपालक दंडाधिकारी के तीन पद खाली हैं, तो सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी का एक पद भी रिक्त पड़ा है. कुछ इसी तरह की स्थिति अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी की भी है. इसी प्रकार से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के तीन पद खुसरूपुर, दनियावां प्रखंड में खाली पड़े हैं, जबकि फतुहा प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी की तैनाती है.
इसी प्रकार से अंचल अधिकारी फतुहा का पद भी रिक्त पड़ा है. वहीं उप निर्वाचन पदाधिकारी का एक पद है, इस पर भी प्रशिक्षण के लिए अधिकारी को भेजा गया है. स्थिति यह है कि अपर अनुमंडल पदाधिकारी की तैनाती भी अनुमंडल में लगभग दो माह पहले हुई है, जिन्होंने हाल के दिनों में योगदान दिया है. वर्तमान में एसडीओ, अपर अनुमंडल पदाधिकारी, डीसीएलआर व एक कार्यपालक दंडाधिकारी अनुमंडल में कार्य को निष्पादित कर रहे हैं.
रिक्त पड़े हैं ये पद
कार्यपालक दंडाधिकारी : स्वीकृत तीन, कार्यरत एक
अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी : स्वीकृत एक खाली
प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी : दनियावां व खुसरूपुर में खाली
अंचल अधिकारी, फतुहा का पद रिक्त
उपनिर्वाचन पदाधिकारी : प्रशिक्षु की तैनाती
लोगों को हो परेशानी
अनुमंडल कार्यालय में अधिकारियों के पद रिक्त रहने की स्थिति में कामकाज पर भी इसका असर पड़ता है. सबसे अहम बात की विधि-व्यवस्था के बनाने रखने के लिए अधिकारियों की तैनाती की जाती है, लेकिन अधिकारियों के नहीं रहने की स्थिति में विधि-व्यवस्था के कामकाज पर ज्यादा असर पड़ता है. खासतौर पर अतिक्रमण हटाने, परीक्षा को सुचारु ढंग से निष्पादित कराने, विवादित मामलों की जांच कराने समेत अन्य मामले हैं. इसमें समस्या होती है.
प्रमाणपत्र व जांच रिपोर्ट में भी देरी
अनुमंडल के तहत चार प्रखंड पटना सदर, फतुहा, दनियावां व खुसरूपुर आते हैं. ऐसे में चारों प्रखंडों से आय, आवासीय, जाति, आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्र व जमीन से जुड़े विवाद व मिली लोक शिकायत की जांच समेत अन्य कार्य प्रभावित होते हैं. स्थिति यह है कि अधिकारियों की कमी के कारण प्रमाणपत्र निर्गत करने के लिए एक ही अधिकारी को प्रतिदिन दर्जनों आवेदन पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




