पटना : कृषि ग्रोथ रेट 3.4%, फिर भी लोन में परेशानी
Updated at : 13 Feb 2020 8:20 AM (IST)
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कौशिक रंजन बैंकों में 12 % की दर से बढ़ती जा रही डिपॉजिट, पर किसानों को कर्ज देने में करते आनाकानी पटना : बिहार के कोर सेक्टर में प्रमुख कृषि के क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा, बदलते मौसम समेत अन्य विषम परिस्थितियों के बाद भी ग्रोथ की दर 3.40 प्रतिशत आंकी गयी है. इसके बावजूद बैंक […]
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कौशिक रंजन
बैंकों में 12 % की दर से बढ़ती जा रही डिपॉजिट, पर किसानों को कर्ज देने में करते आनाकानी
पटना : बिहार के कोर सेक्टर में प्रमुख कृषि के क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा, बदलते मौसम समेत अन्य विषम परिस्थितियों के बाद भी ग्रोथ की दर 3.40 प्रतिशत आंकी गयी है. इसके बावजूद बैंक इस सेक्टर में आर्थिक सहायता देने में उतनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. हाल में राज्य सरकार और नाबार्ड के स्तर पर की गयी समीक्षा में इससे जुड़े कई अहम तथ्य सामने आये हैं.
सूबे के बैंकों की डिपॉजिट में 12 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. फिर भी राज्य के कोर सेक्टर कृषि को सपोर्ट कर सशक्त बनाने के लिए इससे जुड़ी योजनाओं में लोन देने में उतनी रुचि नहीं दिखा रहे. बैंकों के स्तर से किसानों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) देने की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है. 2014-15 के दौरान 36 लाख 14 हजार किसानों को केसीसी दिये गये थे. वहीं, 2016-17 के दौरान यह संख्या घटकर 25 लाख 30 हजार और 2018-19 में यह 19 लाख 55 हजार तक पहुंच गयी.
फसल बीमा देने में भी कटौती हो रही
पिछले पांच वर्षों में कम हो गयी केसीसी की संख्या, 2014-15 में हुए थे 36 लाख 14 हजार केसीसी, 2018-19 में इनकी संख्या घटकर हो गयी 19 लाख 55 हजार कृषि क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 42 हजार करोड़ लोन बांटने का रखा गया था लक्ष्य, 19 हजार करोड़ ही हुए वितरित
इसी तरह किसानों को फसल बीमा देने में भी कटौती हो रही है. 2014-15 के दौरान 52 फीसदी किसानों को इसका लाभ मिला था, परंतु 2018-19 के दौरान लाभ लेने वाले किसानों की संख्या घटकर 38 प्रतिशत हो गयी. अगर मछली उत्पादक किसानों को केसीसी देने की बात करें, एक साल के दौरान सिर्फ 13 को केसीसी दिया गया था. कृषि के अलावा मछली पालन, दुग्ध उत्पादन, मुर्गीपालन समेत कृषि से जुड़ी ऐसी अन्य योजनाओं में भी बैंकों के स्तर से लोन नहीं दिये जाते हैं.
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