फर्जीवाड़ा : इपीएफओ ने बिहार के पांच हजार पीएफ अकाउंटों को किया ब्लॉक, जानें क्‍या है कारण

Updated at : 04 Feb 2020 8:08 AM (IST)
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फर्जीवाड़ा : इपीएफओ ने बिहार के पांच हजार पीएफ अकाउंटों को किया ब्लॉक, जानें क्‍या है कारण

सुबोध कुमार नंदन कंपनियों ने अवैध तरीके से छह करोड़ का फायदा उठाया पटना : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) ने देश के नौ लाख कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है. इसमें बिहार के पांच हजार से अधिक पीएफ अकाउंट को ब्लॉक करने की सूचना है. लेकिन पटना स्थित क्षेत्रीय […]

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सुबोध कुमार नंदन

कंपनियों ने अवैध तरीके से छह करोड़ का फायदा उठाया

पटना : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) ने देश के नौ लाख कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है. इसमें बिहार के पांच हजार से अधिक पीएफ अकाउंट को ब्लॉक करने की सूचना है.

लेकिन पटना स्थित क्षेत्रीय इपीएफओ के अधिकारी ने इस संबंध में अभी बताने से इन्कार कर दिया है. जानकारी के अनुसार सूबे में 1.35 लाख से अधिक कर्मचारी हैं, जो प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत निबंधित हैं. वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 35 हजार नये कर्मचारियों का निबंधन इस योजना के तहत हुआ है. इसका लाभ 688 कंपनियां उठा रही हैं. पांच हजार से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के लिए अयोग्य पाया गया है. 296 कंपनियों ने प्रोत्साहन योजना के तहत अवैध तरीके से लगभग छह करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन का फायदा उठाया है.

प्रोत्साहन स्कीम के तहत सूबे में 1.35 लाख कर्मचारी निबंधित

300 करोड़ से अधिक की हेरा-फेरी

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने 80 हजार से अधिक कंपनियों का पता लगाया है, जिन्होंने सामान्य क्षेत्र में रोजगार का मौका पैदा करने के लिए केंद्र सरकार की एक फ्लैगशिप योजना के तहत अवैध तरीके से 300 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रोत्साहन का फायदा उठाया है. रिपोर्ट में यह बताया गया है कि प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के नौ लाख लाभार्थियों को इस योजना के लिए अयोग्य पाया गया है, क्योंकि वे इस स्कीम के लागू होने के पहले से ही सामान्य सेक्टर का हिस्सा थे. यानी वे पहले से ही पीएफ का फायदा उठा रहे थे.

जल्द होगी कार्रवाई

सूबे के जिन कर्मियों का प्रॉविडेंट फंड अकाउंट ब्लॉक किया गया है, वे इपीएफओ के पेरोल डेटाबेस में शामिल थे, जिसे केंद्र सरकार सामान्य क्षेत्र में पैदा हुए रोजगार के तौर पर दिखाती है. अधिकारियों की मानें, तो जल्द ही अयोग्य कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई करते हुए रुपये की रिकवरी की जायेगी. साथ ही आपराधिक मामला भी दर्ज किया जायेगा.

अधिकारियों ने बताया कि मोदी सरकार ने रोजगार पैदा करने पर कंपनियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन स्कीम वर्ष 2016 में शुरू की थी. इस स्कीम के तहत 1 अप्रैल, 2016 को या उसके बाद 15 हजार प्रति माह से अधिक वेतन पर रखे गये नये कर्मचारी के इपीएफ और इपीएस का कुल 12 फीसदी का खर्च केंद्र सरकार नियोक्ता को देती है.

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