CAA, NPR और NRC के खिलाफ भारत बंद का बिहार में मिलाजुला असर

पटना : संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में बुधवार को भारत बंद का बिहार में मिलाजुला असर दिखा. बिहार की राजधानी पटना में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और पूर्व सांसद राजेश […]
पटना : संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में बुधवार को भारत बंद का बिहार में मिलाजुला असर दिखा. बिहार की राजधानी पटना में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पार्टी जनअधिकार पार्टी जैसे दलों के नेताओं द्वारा कियेगये प्रदर्शनों के कारण सड़क यातायात के प्रभावित होने को छोड़कर राज्य की राजधानी में सरकारी कार्यालय, स्कूल और निजी प्रतिष्ठान अन्य दिनों की तरह खुले दिखे.
जीतन राम मांझी ने कहा कि बंदी के दौरान जो भी दुकानें बंद रहीं, स्वेच्छा से बंद रही और जो लोग ऐसा करना नहीं चाहते थे, उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया गया. मांझी के साथ महागठबंधन में शामिल रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी बंद के समर्थन में अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकार्ताओं के साथ आज सड़क पर उतरे थे. जनअधिकार पार्टी के संस्थापक पप्पू यादव भी अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बंद को सफल बनाने के लिए पटना के व्यस्तम डाकबंगला चौराहा पहुंचे थे.
महागठबंधन में शामिल मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के नेता और कार्यकर्ता हालांकि बंदी के दौरान सड़कों पर नहीं दिखे पर राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ आयोजित आज के बंद को जिस प्रकार आमलोगों का समर्थन मिला है उससे यह स्पष्ट है कि देश की जनता इन काले कानूनों के खिलाफ है.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि बंद समर्थकों ने सीवान में भारी पथराव किया जिन्हें नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. सूत्रों ने बताया कि हिंसा पर उतारू लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और दोषियों की पहचान की जायेगी और उन्हें गिरफ्तार किया जायेगा. बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और अररिया आदि जिलों में बंद समर्थकों के प्रदर्शन के कारण सड़क यातायात के अवरूद्ध हो जाने से राजमार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गयीं.
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में एक ही मुद्दे पर महागठबंधन, वामदल और बहुजन क्रांति मोर्चा के बैनर तले तीन बार अलग-अलग दिन बाजार बंद कराये गये, लेकिन इन्हें कभी जन समर्थन नहीं मिला. उन्होंने दावा किया कि 34 दलों के बंद का राज्य में कोई असर नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि नागरिकता कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर एक खास समुदाय को गुमराह कर कई हफ्तों से बिहार, दिल्ली समेत देश के विभिन्न भागों में जो भारत तोड़ो आंदोलन चलाया जा रहा है, उसके पीछे करोड़ों रुपये की फंडिंग काम कर रही है. सुशील ने कहा कि आर्थिक और आपराधिक मामलों की जांच एजेंसियां जैसे ही संदेहास्पद फंडिंग रोकने में कामयाब होंगी, नागरिकता विरोधी आंदोलन ठंडे पड़ जायेंगे.
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