मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड : 14 जनवरी तक फैसला टला

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर में एक आश्रय गृह में कई लड़कियों से कथित यौन और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में गुरुवार को फैसला करीब एक महीने के लिए टाल दिया. यह आश्रय गृह ब्रजेश ठाकुर चलाते थे. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदेश कुमार ने फैसला 14 जनवरी तक टाल दिया, क्योंकि मामले में सुनवाई करने वाले न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ गुुरुवार को छुट्टी पर थे.
इससे पहले भी अदालत ने अपना आदेश 12 दिसंबर तक टाल दिया था, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में सभी छह जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल के कारण तिहाड़ जेल में बंद 20 आरोपियों को अदालत परिसर में नहीं लाया जा सका था.
अदालत ने 20 मार्च, 2018 को नाबालिगों से बलात्कार और यौन उत्पीड़न की साजिश रचने के अपराध में ठाकुर समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये थे. यह मामला उस वक्त सामने आया था, जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआइएसएस) ने 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें आश्रय गृह में नाबालिग लड़कियों से कथित यौन उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया गया था.
अपने परिवार को देख रो पड़ा ब्रजेश ठाकुर
दिल्ली के साकेत कोर्ट नंबर 302 में इस दौरान सभी आरोपित और उनके परिजन मौजूद थे. मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर अपने परिवार वालों को अदालत में देखकर रोने लगा. बाद में पुलिस सभी आरोपितों को लेकर तिहाड़ जेल रवाना हो गयी.
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