दिल्ली की फैक्टरी में लगी आग, 43 मरे, 28 बिहार के

Updated at : 09 Dec 2019 8:56 AM (IST)
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दिल्ली की फैक्टरी में लगी आग, 43 मरे, 28 बिहार के

फैक्टरी में रविवार सुबह 5:22 बजे लगी भीषण आग, जो सोये थे, सोये ही रह गये नयी दिल्ली : दिल्ली में उपहार सिनेमा हादसे के 22 साल बाद बड़ा अग्निकांड हुआ. अनाज मंडी के रिहायशी इलाके में चार मंजिली बिल्डिंग में चल रही फैक्टरी में रविवार की सुबह 5:22 बजे आग लग गयी. घटना के […]

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फैक्टरी में रविवार सुबह 5:22 बजे लगी भीषण आग, जो सोये थे, सोये ही रह गये
नयी दिल्ली : दिल्ली में उपहार सिनेमा हादसे के 22 साल बाद बड़ा अग्निकांड हुआ. अनाज मंडी के रिहायशी इलाके में चार मंजिली बिल्डिंग में चल रही फैक्टरी में रविवार की सुबह 5:22 बजे आग लग गयी. घटना के वक्त फैक्टरी के अंदर 60 से ज्यादा मजदूर सो रहे थे. इनमें से 43 लोग सदा के लिए सो गये, जबकि 15 से ज्यादा जख्मी हुए हैं. मृतकों में 28 बिहार के हैं.
दिल्ली पुलिस ने फैक्टरी के मालिक रेहान को गिरफ्तार कर लिया है़ उसके खिलाफ गैरइरादन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. इसके साथ ही पुलिस ने उसके मैनेजर फुरकान को भी अरेस्ट किया है़ बहुमंजिली इमारत में हवा आने-जाने की भी उचित व्यवस्था नहीं थी, इसलिए अधिकतर की जान दम घुटने से गयी.
सभी झुलसे हुए लोगों को आरएमएल अस्पताल, एलएनजेपी और हिंदू राव अस्पताल में भर्ती करवाया गया़ घटनास्थल व अस्पताल में हृदय विदारक दृश्य था. एक ओर जहां स्थानीय लोग घटनास्थल से बेसुध भाग रहे थे. वहीं, आग की चपेट में आये लोगों के परिजन विभिन्न अस्पतालों में अपनों की पहचान करने में जुटे थे. इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने दुख जताया है.
संकरी गली में थी अवैध फैक्टरी, वहीं काम भी करते थे और सोते भी थे मजदूर
बिहार के 28 मृतकों में समस्तीपुर के नौ सहरसा के छह, सीतामढ़ी के पांच शामिल
पटना़ बिहार के 28 मृतकों में नौ समस्तीपुर, छह सहरसा, पांच सीतामढ़ी, तीन मुजफ्फरपुर, एक-एक बेगूसराय व अररिया के हैं, जबकि तीन के गांव व जिले का पता नहीं चल पाया है. ये लोग वहां फैक्टरी में काम करते थे. इस बीच खबर है कि फैक्टरी मालिक सहरसा जिले के नरियार का रहनेवाला है. वह यहां के लोगों को काम दिलाने दिल्ली ले गया था. श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जो परिजन दिल्ली जाकर वहां दाह-संस्कार करना चाहते हैं या मृतकों के शव गांव लाना चाहते हैं, उन्हें राज्य सरकार हर तरह की सहायता देगी.
रांची के राजेश की जांबाजी, जान पर खेलकर 11 लोगों को बचाया
बहुमंजिली इमारत में लगी आग के बीच 11 लोगों की जान बचाने वाले दमकलकर्मी राजेश शुक्ला को लोग असल जिंदगी का ‘हीरो’ बता रहे हैं. बचाव अभियान के दौरान घायल होने के बावजूद वह लोगों को बाहर निकालने में जुटे रहे. मूल रूप से रांची के रहनेवाले शुक्ला फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं. शुक्ला ने कहा कि धुएं से भरे गलियारों से गुजर कर वह करीब 12 बार इमारत के अंदर गये़ अंत में सांस लेने वाले उपकरण की गैस भी खत्म हो गयी़ धुएं में ज्यादा देर रहने से सिर में तेज दर्द हो रहा था़ वहीं, पैर भी जख्मी हो गया़ यह अग्निकांड भयानक था़
जहरीली गैस से भरी इमारत
एनडीआरएफ के दल ने कहा कि जब उसके सदस्य वहां पहुंचे तो इमारत में जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भरी थी. कुछ खिड़कियां सील भी थीं. एक ही बड़ा कमरा था, जिसमें अधिकतर मजदूर सो रहे थे और वहां हवा के आने-जाने के लिए केवल एक स्थान था.
मुजफ्फरपुर : आग से घिरे मुशर्रफ ने दोस्त को किया फोन, कहा-दोस्ती का फर्ज निभाना, मेरे परिवार का रखना ख्याल
मुजफ्फरपुर : आग की लपटों में घिरे व धुएं से दम घुटने से परेशान मुशर्रफ ने तड़के करीब पांच बजे जान बचाने के लिए दोस्त को कॉल किया था.उसने बताया कि उसका बचना मुश्किल है. अनुरोध किया कि वह दोस्ती का फर्ज निभाते हुए उसके परिवार का ध्यान जरूर रखे.करीब साढ़े तीन मिनट की बातचीत के ऑडियो में वह बार-बार परिवार और बच्चों का ध्यान रखने की गुहार लगा रहा था. अपनों की तलाश में दर-दर भटकते रहे श्रमिकों के परिजन
हादसे के शिकार हुए श्रमिकों के परिजन अपनों की तलाश में सुबह से शाम तक दर-दर भटकते रहे़ अस्पताल में ससुर जसीमुद्दीन व अन्य रिश्तेदार फैसक खाक को ढूंढ़ने पहुंचे मोहम्मद ताज ने कहा कि सूचना मिलते ही मैं यहां पहुंचा, पर पुलिस प्रतिबंध व बचाव अभियान के कारण रिश्तेदारों को नहीं ढूंढ़ पाया. अस्पताल गया, लेकिन पुलिस व अस्पताल के कर्मियों ने कुछ नहीं बताया. वहीं, आसिफ ने कहा कि मैं भजनपुरा से रिश्तेदार की सूचना पाने यहां पहुंचा, पर पुलिस की भारी तैनाती के कारण उन्हें कहीं ढूंढ नहीं पाया. हमने कई अस्पतालों में भी ढूंढ़ा, लेकिन पता नहीं चला. अपने भाई को तलाशने पहुंचे बेगूसराय निवासी मनोज ने कहा कि सुबह से शाम हो गयी, पर यह नहीं पता चला की मेरा भाई कहां है.
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