कब तक पूरे होंगे चकबंदी के काम

Updated at : 06 Dec 2019 5:26 AM (IST)
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कब तक पूरे होंगे चकबंदी के काम

पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य के राजस्व और भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव से चार सप्ताह में यह बताने को कहा हैै कि राज्य में चकबंदी और सर्वे का काम कब तक पूरा कर लिया जायेगा. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश डॉक्टर अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने कैमूर किसान विकास समिति […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य के राजस्व और भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव से चार सप्ताह में यह बताने को कहा हैै कि राज्य में चकबंदी और सर्वे का काम कब तक पूरा कर लिया जायेगा. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश डॉक्टर अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने कैमूर किसान विकास समिति के संयोजक श्याम नारायण तिवारी की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह जानकारी मांगी है. इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद जनवरी महीने में की जायेगी.

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 31 दिसंबर, 2010 तक पूरे राज्य में चकबंदी का कार्य पूरा करने का निर्देश सरकार को दिया था. कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार द्वारा मात्र 2050 राजस्व गांवों के चकबंदी का कार्य पूरा किया गया है.
जिस गांव का चकबंदी कार्य पूरा हुआ है, उसे अधिसूचित कर दिया है. राज्य में 21,792 राजस्व गांव हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 15 मार्च, 2004 को एक अधिसूचना जारी कर कहा था कि राज्य में चकबंदी का कार्य दुबारा शुरू कर उसे जल्द- से -जल्द पूरा कर लिया जायेगा, लेकिन पूरा नहीं हो सका है.
चकबंदी नियम में बदलाव पर सुझाव को 16 को जुटेंगे विशेषज्ञ
पटना. राज्य में लगभग 61 साल पुराने चकबंदी के नियम में बदलाव की तैयारी की जा रही है. राजस्व व भूमि सुधार विभाग बिहार चकबंदी अधिनियम में संशोधन की योजना बना रहा है. इसको लेकर अधिवेशन भवन में 16 से 17 दिसंबर तक कार्यशाला होगी. इसमें देश भर के चकबंदी विशेषज्ञ भाग लेंगे. इसके सुझाव को विभाग की ओर से ड्राफ्टिंग होगी.
विभाग इसके आलोक में एक नयी नियमावली तैयार करेगा. योजना है कि नये नियम को पब्लिक फ्रेंडली बनाया जाये. खेतों तक मुख्य सड़क ले जाने, सामुदायिक भवन के लिए जगह चिह्नित करने से लेकर अन्य कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नियम के साथ जोड़ा जायेगा. गैर प्रासंगिक नियमों को हटाया जायेगा. चकबंदी का काम राज्य में नये सिरे से 2004 से शुरू किया गया था.
सभी कोर्टों में होगी मेडिकल सुविधा तैनात होंगे डॉक्टर, नर्स व लैब इंस्ट्रक्टर
पटना. राज्य के महाधिवक्ता ललित किशोर ने हाइकोर्ट में एक शपथपत्र दायर कर कहा कि प्रदेश के सभी न्यायालयों के न्यायिक पदाधिकारियों के साथ ही वकीलों एवं उनके मुवक्किलों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. इसके लिए न्यायालय परिसर में एक डॉक्टर के अलावा एक एएनएम, एक फार्मासिस्ट, एक लैब इंस्ट्रक्टर और एक क्लर्क की तैनाती तीन माह में कर दी जायेगी.
इन लोगों की नियुक्ति से वहां कार्य करने वाले तथा अपने मुकदमे की पैरवी करने आने वाले मुवक्किलों के स्वास्थ्य की जांच हो पायेगी. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को इस बात की जानकारी अधिवक्ता रंजन कुमार झा द्वारा दायर लोकहित याचिका की सुनवाई के दौरान दी गयी.
महाधिवक्ता ने बताया कि राज्य के 38 जिलाें में स्थित सभी सिविल कोर्ट में मेडिकल स्टाफ के कुल 180 पदों पर बहाली की अनुमति दे दी गयी है. तीन माह में सभी जिलों में संसाधनों के साथ प्राइमरी हेल्थ सेंटर का शुभारंभ कर दिया जायेगा. कोर्ट ने इसी के साथ इस याचिका को निष्पादित करते हुए इसकी सराहना की. कोर्ट ने महाधिवक्ता के प्रयास की भी सराहना की.
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