जल-जीवन-हरियाली : हमने ठाना है, जलवायु परिवर्तन पर करेंगे बड़ा काम : मुख्यमंत्री नीतीश

Updated at : 04 Dec 2019 9:09 AM (IST)
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जल-जीवन-हरियाली : हमने ठाना है, जलवायु परिवर्तन पर करेंगे बड़ा काम : मुख्यमंत्री नीतीश

गणेश वर्मा पश्चिमी चंपारण के चंपापुर से हरियाली यात्रा की शुरुआत चंपापुर (प. चंपारण) : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को पश्चिमी चंपारण जिले के चंपापुर गोनौली गांव से जल-जीवन-हरियाली यात्रा के प्रथम चरण की शुरुआत की. मुख्यमंत्री ने इस गांव में तालाब का मुआयना किया और अधिकारियों को कई सुझाव दिये. जल-जीवन-हरियाली अभियान के […]

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गणेश वर्मा
पश्चिमी चंपारण के चंपापुर से हरियाली यात्रा की शुरुआत
चंपापुर (प. चंपारण) : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को पश्चिमी चंपारण जिले के चंपापुर गोनौली गांव से जल-जीवन-हरियाली यात्रा के प्रथम चरण की शुरुआत की. मुख्यमंत्री ने इस गांव में तालाब का मुआयना किया और अधिकारियों को कई सुझाव दिये. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत गांव में आयोजित जागरूकता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय को देखते हुए आज पर्यावरण संरक्षण बेहद ही जरूरी हो गया है.
जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है. इसे झेल रहे हैं, भुगत रहे हैं, लेकिन पर्यावरण के प्रति सजग नहीं हो रहे हैं. अब हमने ठाना है कि इसे ठीक करेंगे और बिहार के सभी लोगों की सहभागिता से जलवायु परिवर्तन पर बड़ा काम करेंगे. मुख्यमंत्री ने इस दौरान 38.81 करोड़ की 98 योजनाओं का उद्घाटन व 993.35 करोड़ की 743 योजनाओं का शिलान्यास भी किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए इस बात का अनुसंधान चल रहा है कि जलवायु के हिसाब से इलाकावार खेती कैसे की जाये.
यह जरूरी नहीं कि परंपरागत फसलों पर ही किसानों की निर्भरता हो. अगर ऐसा ही होता रहा तो अपेक्षित लाभ नहीं मिल पायेगा. राज्य सरकार इस अनुसंधान में जुटी है कि जलवायु के हिसाब से जिस क्षेत्र में जो फसल ज्यादा अच्छी हो, उसी की खेती हो, ताकि किसान अधिक लाभान्वित हो सकें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम भी मिशन मोड में शुरू किया जायेगा, ताकि जो जल नालियों में बह जाता है, वह भूमिगत जल के रूप में परिवर्तित हो सके. भूमिगत जल स्तर बढ़े, इसके लिए सरकारी भवनों, कुंओं के किनारे सोख्ते बनाये जायेंगे.
सीएम ने कहा कि हम अपनी हर यात्रा की शुरुआत चंपारण से करते हैं. कुछ दिन पहले मैनाटांड आये थे. वहां जल-जीवन-हरियाली यात्रा की घोषणा की थी. उसी के तहत हम आज यहां आये हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले मॉनसून 15 जून तक आ जाता था. अब वर्षा का कोई समय नहीं रह गया है. कहीं बाढ़ है, तो कहीं सुखाड़ है. अजीब संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. 2007 में बाढ़ के दौरान राज्य के 21 जिले और ढाई करोड़ की आबादी पीड़ित हुई थी.
इसके बाद हमने आपदा प्रबंधन पर काम शुरू किया. पहले आपदा प्रबंधन पर काम नहीं होता था. पहले जहां 1200 से 1500 एमएम बारिश होती थी. वह अब घटकर औसत 900 एमएम हो गयी है. भू-जल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है. दक्षिण बिहार में यह समस्या पहले थी, लेकिन अब उत्तर बिहार और मिथिला में भी यह स्थिति उत्पन्न हो गयी है.
बढ़ाना है हरित आवरण
सीएम ने कहा कि बिहार से झारखंड के अलग होने पर यहां हरित आवरण महज नौ फीसदी रह गया था. 2012 में हमने हरियाली मिशन की शुरुआत की और 24 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा. 19 करोड़ पौधे लगाये जा चुके हैं. हरित आवरण 15 फीसदी हो गया है. इसे और बढ़ाना है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 जुलाई को विधानसभा व विधानमंडल के सभी सदस्यों के साथ बैठक हुई. निर्णय हुआ कि जल जीवन हरियाली अभियान चलाया जायेगा. जल और हरियाली में बीच में ‘जीवन’ को इसलिए रखा गया है कि जल और हरियाली रहेगा, तभी जीवन संभव है. मनुष्य ही नहीं, जीव- जंतुओं के लिए भी यह जरूरी है. इसके लिए बिहार में तालाब, पोखर, आहर, पईन को अतिक्रमणमुक्त कर इसका जीर्णोद्धार किया जायेगा. सोख्ता का निर्माण होगा. पौधारोपण भी कराया जा रहा है.
मंच पर खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद, सांसद वैद्यनाथ महतो, विधायक धीरेंद्र प्रताप उर्फ रिंकू सिंह, भागीरथी देवी व विनय बिहारी, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, सचिव चंचल कुमार व अन्य मौजूद रहे.
बदलते परिवेश व मौसम के अनुकूल क्षेत्रवार किसानों को खेती के दिये जायेंगे टिप्स
19 जनवरी को मानव शृंखला
सीएम ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली के समर्थन में 19 जनवरी को पूरे बिहार में मानव शृंखला बनायी जायेगी. उन्होंने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की. कहा कि आप की सहभागिता होगी तो इसकी चर्चा पूरे विश्व में होगी. बिहार की इस पहल को पूरा देश अपनायेगा.
खेत में पुआल नहीं जलाएं, सहायक कृषि यंत्रों पर देंगे 80% तक सब्सिडी सीएम ने खेतों में पुआल नहीं जलाने की अपील की. कहा कि पहले यह प्रथा राज्य में नहीं थी, पर कुछ वर्षों से दक्षिण बिहार के रोहतास, कैमूर, पटना जैसे जिलों में लोग फसल के अवशेष जला देते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचती है. धीरे-धीरे यह चलन उत्तर बिहार में भी बढ़ रहा है.
मेरा आग्रह है कि पराली को किसी भी स्थिति में नहीं जलाएं. इसका बहुत लाभ है. पराली जलाने से बचने के लिए राज्य सरकार सहायक कृषि यंत्रों पर 75% सब्सिडी देगी. अति पिछड़ा, एससी-एसटी को 80% सब्सिडी िमलेगी. चार कृषि यंत्रों-हैक्टी सीडर, जीरो टिलेज, रिक्टी मल्चर, एक्स्ट्रा टीपर, रिपर कंबाइंडर पर सब्सिडी मिलेगी.
सीएम की चेतावनी
कोयला खत्म हो जायेगा तो कहां से आयेगी बिजली
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि आने वाले समय में ईंधन (कोयला) की कमी होनी तय है. लिहाजा आज जो बिजली हमें मिल रही है, वह मिलनी बंद भी हो सकती है. कारण कि कोयला एक सीमित संसाधन है, इसलिए हमें अक्षय ऊर्जा पर अपनी निर्भरता बढ़ानी होगी. अक्षय ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सौर ऊर्जा है, जो कभी खत्म नहीं हो सकती. सरकारी भवनों पर सोलर प्लेट लगाने का काम किया जा रहा है.
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