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बिहार में ऑनलाइन दाखिल-खारिज फिर से शुरू, 30 दिन बाद राज्य के सभी खेतों को पानी

Updated at : 01 Dec 2019 9:13 AM (IST)
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बिहार में ऑनलाइन दाखिल-खारिज फिर से शुरू, 30 दिन बाद राज्य के सभी खेतों को पानी

पटना : राज्य के सभी अंचलों में दाखिल- खारिज की प्रक्रिया एक बार फिर ऑनलाइन शुरू हो गयी है. राजस्व भूमि सुधार विभाग की ओर से ऑनलाइन दाखिल- खारिज व लगान जमा करने वाली वेबसाइट में सुधार कर दिया गया है. बीते कई दिनों की गड़बड़ी व सेवा बंद होने के बाद अब आंशिक रूप […]

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पटना : राज्य के सभी अंचलों में दाखिल- खारिज की प्रक्रिया एक बार फिर ऑनलाइन शुरू हो गयी है. राजस्व भूमि सुधार विभाग की ओर से ऑनलाइन दाखिल- खारिज व लगान जमा करने वाली वेबसाइट में सुधार कर दिया गया है.
बीते कई दिनों की गड़बड़ी व सेवा बंद होने के बाद अब आंशिक रूप से सुधार कर साइट को दोबारा चालू किया गया है. बीते कई सप्ताह तक दाखिल -खारिज का मामला बंद रहने के कारण आवेदनों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. राज्य में अब तक 22.43 लाख मामले दाखिल- खारिज के आये हुए हैं. इनमें अब तक मात्र 12.75 लाख आवेदनों का निबटारा हो पाया है. यानी अब भी 9.68 लाख दाखिल- खारिज के आवेदन लंबित हैं. इन्हें विभाग द्वारा निबटाने का निर्देश दिया गया है.
15 लाख ऑनलाइन जमा हुआ लगान
दाखिल- खारिज के अलावा ऑनलाइन लगान जमा करने की रफ्तार भी काफी सुस्त है. साइट की गड़बड़ी के कारण लोग जमा नहीं कर पा रहे थे. अब तक मात्र 15 लाख रैयतों ने लगान जमा किया है. विभाग की ओर से सभी अंचलों को जल्द- से- जल्द ऑनलाइन लगान जमा करने की रफ्तार में तेजी लाने के निर्देश दिये गये हैं.
30 दिन बाद राज्य के सभी खेतों को पानी
पटना : राज्य में 30 दिन बाद सभी खेतों को पानी मिलने लगेगा. किसानों को सिंचाई के लिए कृषि फीडर से तीन शिफ्ट में चार-चार घंटे बिजली मिलेगी. खेतों को बिजली से पानी मिलने से सिंचाई की लागत प्रति एकड़ 13 सौ रुपये की बचत होगी. अभी प्रति एकड़ 1500 रुपये का डीजल खर्च होता है, जो घटकर करीब दो सौ रुपये हो जायेगा.
डीजल पर निर्भरता खत्म होने से किसानों को डीजल अनुदान के रूप में हर साल दिये जाने वाले करीब दो अरब रुपये की बचत सरकार को होगी. सिंचाई के लिए पंपिंग सेट का उपयोग बंद होने से उससे निकलने वाले धुएं और आवाज से पर्यावरण की सुरक्षा हो सकेगी.
फसलों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा, फसल उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी और किसानों को आर्थिक लाभ होगा. सूत्रों का कहना है कि 31 दिसंबर तक करीब छह हजार करोड़ रुपये की लागत से 1312 डेडीकेटेड कृषि फीडर बनाये जाने थे. इसमें से अब तक करीब 980 कृषि फीडर बन चुके हैं. साथ ही कृषि कार्य के लिए 260 पावर सब स्टेशन बनने थे. इसमें से करीब दो सौ सब स्टेशन बनाये जा चुके हैं. अलग ट्रांसफॉर्मर लगाने का काम करीब 25 फीसदी बचा हुआ है. यह सभी काम तय समय में पूरा करने के लिए बिजली कंपनी में लगातार समीक्षा हो रही है.
वर्ष 2018-19 में दो अरब रुपये से अधिक डीजल सब्सिडी
डीजल सब्सिडी के रूप में वर्ष 2018-19 में खरीफ मौसम में 15 लाख 66 हजार किसानों के बीच एक अरब 76 करोड़ 65 लाख रुपये दिये गये. वहीं रबी मौसम में छह लाख 75 हजार किसानों के बीच 84 करोड़ 61 लाख रुपये दिये गये. 2019-20 में खरीफ मौसम में दो लाख 97 हजार किसानों के बीच 38 करोड़ 46 लाख रुपये दिये गये.
कृषि कार्यों के लिए 75 पैसे प्रति यूनिट बिजली
राज्य में कृषि कार्यों के लिए 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से किसानों को बिजली मिलेगी. सरकारी नलकूपों के चलाने सहित रखरखाव की जिम्मेवारी पंचायतों को दे दी गयी है. ऐसे में किसानों से सिंचाई शुल्क वसूल कर समय पर बिजली बिल का भुगतान उनके माध्यम से हो सकेगा.
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