पटना : फर्जी 7,368 का जीएसटी निबंधन रद्द
Updated at : 30 Nov 2019 8:08 AM (IST)
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स्टेकहोल्डर्स और इन्वेस्टर्स समिट-2019 को उपमुख्यमंत्री ने किया संबोधित पटना : देश में जीएसटी लागू होने के पहले बिहार में 1,59,721 डीलर निबंधित थे. मगर जीएसटी लागू होने पर निबंधन प्रक्रिया के सरलीकरण के बाद आश्चर्यजनक ढंग से ढाई वर्षों में 2.72 लाख नये निबंधन से संदेह होता है. ये बातें सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील […]
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स्टेकहोल्डर्स और इन्वेस्टर्स समिट-2019 को उपमुख्यमंत्री ने किया संबोधित
पटना : देश में जीएसटी लागू होने के पहले बिहार में 1,59,721 डीलर निबंधित थे. मगर जीएसटी लागू होने पर निबंधन प्रक्रिया के सरलीकरण के बाद आश्चर्यजनक ढंग से ढाई वर्षों में 2.72 लाख नये निबंधन से संदेह होता है. ये बातें सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने शुक्रवार को कहीं.
केंद्र सरकार के कंपनी मामलों के मंत्रालय और भारतीय कंपनी सचिव संस्थान की ओर से आयोजित ‘स्टेकहोल्डर्स व इंवेस्टरर्स समिट-2019 को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के दौरान 90,626 ऐसे करदाता पाये गये हैं, जिन्होंने छह महीने से अधिक तक रिटर्न दाखिल नहीं किया. 7,368 फेक कारोबारियों के निबंधन को रद्द किया गया है. 319 कारोबारियों के परिसर के भौतिक सत्यापन में अब तक 18 फर्जी पाये गये हैं.
सीएसआर फंड ट्रस्ट गठित करने का प्रस्ताव विचाराधीन
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के 190 देशों में व्यापार की सुगमता के मामले में 2014 में भारत जहां 142वें स्थान पर था. वहीं, 79 अंकों के सुधार के साथ 2019 में 63वें स्थान पर आ गया है. मोदी ने कहा कि बिहार सरकार ‘सीएसआर फंड ट्रस्ट’ गठित करने पर विचार कर रही है.
ताकि, कंपनी एक्ट के तहत बड़ी कंपनियों की ओर से सामाजिक दायित्व के निर्वहन पर खर्च की जाने वाली दो फीसदी राशि का ज्यादा हिस्सा बिहार के लिए हासिल किया जा सके. पिछले चार सालों में खर्च हुए सीएसआर फंड के 8,636 करोड़ में से बिहार को मात्र 271 करोड़ ही मिल पाया है. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद जहां डिजिटल ट्रांजेक्शन में तीन गुना की वृद्धि हुई है.
वहीं, पूरे देश में तीन साल में नगदी प्रवाह में तीन लाख, चार हजार करोड़ की कमी आयी है. नोटबंदी के बाद बिहार में 19 हजार ऐसे खाते पाये गये, जिनमें दो लाख से अधिक तथा 1900 खाते में एक करोड़ से अधिक राशि जमा किये गये. आयकर विभाग ऐसे खातों की जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद पूरे देश में 3 लाख, 38 हजार तथा बिहार में 5,913 फर्जी व शेल कंपनियों के निबंधन रद्द किये गये हैं.
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने कहा कि कारोबारियों को समय पर जीएसटी रिटर्न दाखिल करना चाहिए. इससे कारोबार में सहुलियत मिलती है. उन्होंने कहा कि कंपनी रजिस्ट्रार को समय-समय पर कंपनियों की कार्यों की जांच करनी चाहिए. ताकि, सरकार को राजस्व की हानि न हो. मौके पर उपमुख्यमंत्री ने भारतीय कंपनी सचिव की ओर से नेहा प्रसाद को सम्मानित किया. कार्यक्रम को परिवहन सचिव संजय अग्रवाल, सॉलिसिटर जेनरल ऑफ इंडिया एसडी संजय, मिनिस्ट्री कॉरपोरेट अफेयर्स के क्षेत्रीय निदेशक (पूर्व) डी बंधोपाध्याय ने संबोधित किया. धन्यवाद ज्ञापन रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (बिहार) हिमांशु शेखर ने किया.
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