पटना : पीपीयू में रजिस्ट्रार का प्रभार डीएसडब्ल्यू को सौंपा गया
Updated at : 28 Nov 2019 9:14 AM (IST)
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रजिस्ट्रार के रहते हुए डीएसडब्ल्यू को दिया प्रभार पटना : पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में एक बार फिर रजिस्ट्रार के साथ कुलपति प्रो गुलाब चंद्र जायसवाल की नहीं बन रही है. यही कारण है कि वर्तमान रजिस्ट्रार कर्नल इरशाद ए खान से उनका प्रभार हटा कर स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन (डीएसडब्ल्यू) को दे दिया गया है. इसके पीछे […]
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रजिस्ट्रार के रहते हुए डीएसडब्ल्यू को दिया प्रभार
पटना : पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में एक बार फिर रजिस्ट्रार के साथ कुलपति प्रो गुलाब चंद्र जायसवाल की नहीं बन रही है. यही कारण है कि वर्तमान रजिस्ट्रार कर्नल इरशाद ए खान से उनका प्रभार हटा कर स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन (डीएसडब्ल्यू) को दे दिया गया है. इसके पीछे का कारण कोई भी बताना नहीं चाह रहा है लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि कुलपति व रजिस्ट्रार के बीच कई बातों को लेकर अापस में नहीं बन रही है.
कुलपति के द्वारा मनमाना रवैया अपनाया जा रहा है और रजिस्ट्रार को उस पर सहमति के लिए दबाव बनाया जा रहा है. रजिस्ट्रार के द्वारा उक्त मामले में सहमति नहीं होने की वजह से उन्हें चार्ज से कुलपति के द्वारा हटा दिया गया है और डीएसडल्ब्यू को चार्ज दे दिया गया है.
इस मामले में रजिस्ट्रार इरशाद ए खान ने बताया कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है लेकिन यह सच है कि उनके रहते हुए रजिस्ट्रार का चार्ज डीएसडब्ल्यू को दे दिया है और वही सारा काम कर रहे हैं. ऐसा क्यों किया गया किस अधिकार से, किस नियम के तहत यह मैं नहीं बता सकता. फिलहाल मैं यही कहूंगा कि अभी भी मैं सरकारी मुलाजिम हूं. विवि में समय पर अपनी ड्यूटी पर जा रहा हूं.
पहले रजिस्ट्रार को भी हटना पड़ा था
इससे पूर्व कर्नल कामेश कुमार पीपीयू के रजिस्ट्रार थे. उनके साथ भी कुलपति का समन्वयन नहीं बना था. कर्नल कामेश कुमार ने कुलपति के नीतियों का खुल कर विरोध किया था. अंतत: उन्हें वहां से जाना पड़ा था. वर्तमान में कर्नल कामेश कुमार मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार हैं. उक्त मामले का एएन कॉलेज छात्र संघ के कन्हैया कुमार ने कहा कि कुलपति समेत ज्यादातर अधिकार पीपीयू में मनमाने तौर पर काम कर रहे हैं.
वे सिर्फ अपना लाभ देख रहे हैं और छात्रों की समस्या को नहीं देखते हैं. यही वजह है कि जो भी रजिस्ट्रार वहां जाते हैं, उन्हें काम नहीं करने दिया जाता है. उनसे मनमाने निर्णयों पर सहमति लेने की कोशिश की जाती है और मना करने पर इसी तरह से चार्ज से हटा दिया जाता है. जबकि इसका अधिकार कुलपति को नहीं है कि किसी के रहते उनके पद पर किसी और को चार्ज दे दिया जाये.
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