पटना : फसल चक्र में बदलाव जरूरी, 40 गांव बनेंगे मॉडल: सीएम नीतीश कुमार
Updated at : 21 Nov 2019 6:16 AM (IST)
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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. इसके अनुकूल खेती करने की जरूरत है. सिर्फ धान-गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि फसल चक्र में बदलाव करने की आवश्यकता है. सीएम बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में जल-जीवन-हरियाली अभियान के अहम हिस्से ‘जलवायु अनुकूल […]
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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. इसके अनुकूल खेती करने की जरूरत है. सिर्फ धान-गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि फसल चक्र में बदलाव करने की आवश्यकता है.
सीएम बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में जल-जीवन-हरियाली अभियान के अहम हिस्से ‘जलवायु अनुकूल कृषि’ का शुभारंभ कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के आठ जिलों में पांच-पांच गांवों का चयन किया गया है. इन 40 गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जायेगा.
फिर इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू किया जायेगा. मुख्यमंत्री ने जलवायु अनुकूल कृषि अभियान के शुरू पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि अब मैं कॉन्फिडेंट हो गया हूं, यह शुरू हो गया, तो लोग इसकी तरफ आकर्षित होंगे ही. आठ जिलों मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नवादा, गया और नालंदा के पांच-पांच गांवों का चयन किया गया है. इस तरह 40 गांवों को मॉडल के रूप में तैयार किया जायेगा. इसके लिए 60 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं. वहीं, मुख्यमंत्री ने कृषि निदेशक के शॉर्ट नेम पर ली चुटकी ली.
एससी, एसटी व इबीसी किसानों को मिलेगा 80% तक अनुदान
सीएम ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि में मदद के लिए पांच तरह की आधुनिक मशीनों पर 75% अनुदान दिया जा रहा है. एससी-एसटी और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के किसानों को इन मशीनों पर 80% तक अनुदान दिया जायेगा. अगर जरूरत पड़ी, तो अनुदान की राशि बढ़ायी भी जा सकती है. पराली प्रबंधन को भी जल-जीवन-हरियाली अभियान से जोड़ा गया है.
तीन वर्षों में पांच हजार करोड़ के बांटे गये अनुदान
पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि प्राकृतिक आपदा के कारण राज्य के किसानों को पिछले तीन वर्ष (2017-19) में पांच हजार करोड़ से ज्यादा रुपये अनुदान के रूप में बांटे गये हैं. 2017 में दो हजार 832 करोड़ ग्रेच्युटस रिलीफ (जीआर) के रूप में बांटे गये हैं.
डिप्टी सीएम जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का विकास पर सीधा असर पड़ रहा है. अगर अनुदान के ये रुपये बचते, तो विकासात्मक कार्य में खर्च होते. इस साल दो बार आयी बाढ़ से प्रभावित 31 लाख परिवारों को छह-छह हजार की दर से एक हजार 912 करोड़ रुपये अनुग्रह राशि तथा तीन लाख 96 हजार 140 हेक्टेयर में फसल क्षति अनुदान के तौर पर 507 करोड़ का भुगतान किया जा रहा है.
इस बार कई इलाकों में सूखे के कारण चार लाख हेक्टेयर में धान की बुआई नहीं हुई. इसमें 236 करोड़ रुपये अनुदान दिये गये. वहीं, 2017 में आयी अचानक बाढ़ के बाद 38 लाख परिवारों के बीच अनुग्रह राशि के रूप में दो हजार 358 करोड़ बांटे गये थे. उन्होंने कहा कि इस साल जुलाई में औसत से 20 प्रतिशत अधिक, अगस्त में 51 प्रतिशत कम और सितंबर में 82 फीसदी अधिक बारिश होने के कारण बिहार में कभी बाढ़, तो कभी सुखाड़ की स्थिति उत्पन्न हुई है.
इस कार्यक्रम के दौरान जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत चुने गये जिलों से लाइव कृषि यंत्रों का उपयोग खेतों में करते हुए दिखाया गया. इसका प्रसारण सीधे खेतों से कार्यक्रम स्थल के स्क्रीन पर किया गया.
इस दौरान मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, कृषि सचिव एन श्रवणन कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा, कृषि निदेशक आदेश तितरमारे, गोपाल सिंह समेत अन्य मौजूद थे.
95 फीसदी किसान लघु और सीमांत : प्रेम
कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में 95 फीसदी किसान लघु और सीमांत हैं. ये लोग तकनीक का प्रयोग करके कृषि में उन्नति कर सकते हैं. राज्य के पांच प्रखंड में कृषि चौपाल की शुरुआत हो रही है. इससे किसानों को तमाम तरह की जानकारी दी जायेगी. करीब सभी पंचायतों में कृषि कार्यालय शुरू हो गये हैं.
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