पटना : हीमोफीलिया के राज्य में 11 हजार मरीज, निबंधित मात्र 1386

Updated at : 13 Nov 2019 9:24 AM (IST)
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पटना : हीमोफीलिया के राज्य में 11 हजार मरीज,  निबंधित मात्र 1386

प्रहलाद पटना : स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र 1386 हीमोफीलिया मरीजों का निबंधन है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में 10 हजार की आबादी में एक व्यक्ति हीमोफीलिया के रोग से ग्रसित है. ऐसे में बिहार में हीमोफीलिया के 11 हजार मरीज हो सकते हैं. लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के […]

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प्रहलाद
पटना : स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र 1386 हीमोफीलिया मरीजों का निबंधन है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में 10 हजार की आबादी में एक व्यक्ति हीमोफीलिया के रोग से ग्रसित है.
ऐसे में बिहार में हीमोफीलिया के 11 हजार मरीज हो सकते हैं. लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के समक्ष इस बीमारी से ग्रसित मरीजों का मात्र 1386 निबंधन है. हीमोफीलिया के फैक्टर आठ और नौ के मरीज को पीएमसीएच में पिछले दो वर्षों से नियमित दवा मिल जाती है, लेकिन फैक्टर सात से पीड़ित मरीजों के लिये सरकार ने दवा का इंतजाम नहीं किया है. इसके लिए अब तक टेंडर नहीं हुआ है.
लगभग 36 लाख से बना था न्यू गार्डिनर रोड परिसर में अस्पताल : हीमोफीलिया मरीजों पर प्रशिक्षण और शोध करने के लिये न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल परिसर में संस्थान खोला गया. जहां हीमोफीलिया मरीजों पर शोध होना था, लेकिन इस जगह पर कभी कोई शोध नहीं हो पाया. इस अस्पताल में हीमोफीलिया सेल बनाने में लगभग 36 लाख की लागत आयी. शत्रुघ्न सिन्हा और हेमा मालिनी के सांसद फंड से यह अस्पताल बना था. लेकिन जो मरीज यहां आते हैं, उन्हें मौखिक ही पीएमसीएच का रास्ता दिखा दिया जाता है.
2007 में हाइकोर्ट के निर्देश केबाद पीएमसीएच, न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल परिसर में बना हीमोफीलिया सेंटर, गया और मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज में फैक्टर आठ व नौ मरीजों को दिया जाता है, लेकिन सच्चाई यही है कि पीएमसीएच में फैक्टर अगर मरीजों को मिलेगा, तो राज्यभर के किसी अस्पताल में नहीं मिलेगा. वहीं, फैक्टर सात के लिये आज तक खरीद नहीं की गयी है.
यह है 1386
मरीजों का आंकड़ा
फैक्टर आठ 1300
फैक्टर नाै80
फैक्टर सात06
अस्पतालों में ट्रेंड डॉक्टर नहीं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2006 में न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल परिसर में हीमोफीलिया अस्पताल का उद्घाटन किया था. 2007 से 2015 तक डॉ नीलम सहायक प्रतिनियुक्ति रही, लेकिन यहां सरकार की ओर से शोध के लिये कोई व्यवस्था नहीं की गयी. बाद में सरकार ने निर्णय लिया कि हीमोफीलिया अस्पताल की जिम्मेदारी भी न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल को सौंप दी जाये, जहां इलाज के साथ प्रशिक्षण हो. बावजूद अभी तक मेडिकल कॉलेजों में एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं है. अभी तक सरकारी अस्पतालों में मेडिसिन के डाॅ ही मरीजों का इलाज करते है.
जागरूकता अभियान जरूरी है. इससे मरीजों की पहचान हो सकेगी. बीमारी की पहचान के लि, जो भी निर्णय लिया है, उसे पूरा नहीं किया गया है.कुमार शैलेंद्र, सचिव, हीमोफीलिया सोसाइटी.
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