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पढ़ाई पूरी करने के बाद बैंकों ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत मंजूर किया कर्ज

Updated at : 06 Nov 2019 8:29 AM (IST)
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पढ़ाई पूरी करने के बाद बैंकों ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत मंजूर किया कर्ज

पटना : इसे बैंकों की असंवेदनशीलता का हद ही कहा जायेगा कि उसने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत सैकड़ों छात्रों के लोन तब मंजूर किये, जब विद्यार्थियों ने अपनी उच्च शिक्षा करीब-करीब पूरी कर ली. एक- दो नहीं, बल्कि सैकड़ों ऐसे भी विद्यार्थी थे, जिन्होंने लोन मिलने में देरी होने से अपनी मनपसंद पढ़ाई […]

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पटना : इसे बैंकों की असंवेदनशीलता का हद ही कहा जायेगा कि उसने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत सैकड़ों छात्रों के लोन तब मंजूर किये, जब विद्यार्थियों ने अपनी उच्च शिक्षा करीब-करीब पूरी कर ली. एक- दो नहीं, बल्कि सैकड़ों ऐसे भी विद्यार्थी थे, जिन्होंने लोन मिलने में देरी होने से अपनी मनपसंद पढ़ाई का ख्वाब ही त्याग दिया. मंजूर हुए शिक्षा ऋण बेमतलब साबित हुआ. विद्यार्थियों ने वे कर्ज लिये भी नहीं. हालांकि, बैंकों ने तकनीकी आधार पर उनके आधार नंबर फ्रीज कर दिया.ऐसे फ्रीज आधारों की संख्या तीन हजार से अधिक है.
लोन का आवेदन नहीं कर पा रहे
जानकारी के मुताबिक आधार नंबर फ्रीज हो जाने की वजह ऐसे सैकड़ाें छात्र बिहार सरकार से अब नये सिरे से उच्च शिक्षा के लिए लोन का आवेदन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके आधार पर बैंकों का लोन चढ़ा हुआ है.
यह बात और है कि ये लोन उन्होंने कभी हासिल नहीं किया. तीन हजार ऐसे मामलों में 1400 मंजूर लोन के मामले बैंकों ने अपने पोर्टल पर अपडेट तक नहीं किये. इसलिए इनकी मंजूरी की जानकारी भी छात्रों को नहीं मिल सकी.
विभाग भी इन मंजूर केसों को लेकर कोई निर्णय नहीं कर सका. गौरतलब है कि लोन के ये सभी मामले एक अप्रैल 2018 से पहले के हैं. दरअसल इस अवधि से पहले उच्च शिक्षा के लिए लोन बैंकों के माध्यम से मिलते थे. अब ये काम सरकार ने खुद अपनी एजेंसी के हवाले कर रखा है.
बैंक बरत रहा उदासीनता
फिलहाल शिक्षा विभाग ऐसे विद्यार्थियों के आधार नंबरों की वापसी के लिए तैयार हुआ है. उसने 6 नवंबर को विभिन्न बैंकों की बैठक बुलायी है. बैठक में बैंकों से कहा जायेगा कि तकनीकी मामलों को सुलझा कर छात्रों के आधार वापस किये जायें. दरअसल बैंक भी जानता है कि आधार नंबर गलत तरीके से फ्रीज हैं क्योंकि लोन लिये ही नहीं गये. चूंकि लोन विभिन्न प्रक्रिया के बाद मंजूर किये हैं, इसलिए उसमें तकनीकी पेंचो को सुलझाने में कोई नया बैंक प्रबंधक रुचि नहीं ले रहा है.
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