पटना : लाइसेंस अवधि खत्म, फिर भी ऐफिडेविट कर रहे नोटरी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Nov 2019 9:17 AM

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कौशिक रंजन पटना : लोगों को कई सरकारी या गैरसरकारी कामों में शपथपत्र या ऐफिडेविट देना अनिवार्य होता है. यह किसी बात या मसले को कानूनी रूप से सत्यापित करने का माध्यम है, परंतु इस बेहद महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया को करने में नोटरी पब्लिक के स्तर से किसी मानक का पालन नहीं किया जाता है. […]

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कौशिक रंजन
पटना : लोगों को कई सरकारी या गैरसरकारी कामों में शपथपत्र या ऐफिडेविट देना अनिवार्य होता है. यह किसी बात या मसले को कानूनी रूप से सत्यापित करने का माध्यम है, परंतु इस बेहद महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया को करने में नोटरी पब्लिक के स्तर से किसी मानक का पालन नहीं किया जाता है. राज्य के 90 फीसदी नोटरी में यह लापरवाही पायी गयी है.
अक्तूबर महीने के अंतिम सप्ताह में विधि विभाग की एक विशेष टीम ने पटना सिविल कोर्ट व पटना सिटी कोर्ट समेत अन्य शहरों में मौजूद न्यायालयों परिसरों या जिला कार्यालयों के पास मौजूद बड़ी संख्या में नोटरी की जांच की. इसमें यह पाया गया कि ये लोग जिस व्यक्ति का ऐफिडेविट करते हैं, उससे संबंधित कोई दस्तावेज ही इनके पास नहीं है. किसी व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड ही इनके पास समुचित तरीके से मेंटेन नहीं है.
इस लापरवाही के मद्देनजर राज्य में 100 से ज्यादा नोटरी को अंतिम चेतावनी जारी की गयी है. विधि विभाग के सचिव के स्तर से सख्त लहजे में इन्हें यह निर्देश दिया गया है कि वे बिना नियम का पालन किये कोई ऐफिडेविट नहीं करेंगे. अगर दोबारा इस तरह की गलती पकड़ी गयी, तो संबंधित नोटरी का लाइसेंस रद्द कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.
जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नोटरी पब्लिक भी सामने आये हैं कि इनकी लाइसेंस अवधि समाप्त होने के बाद भी इन्होंने अपनी प्रैक्टिस जारी रखे हुए हैं, जबकि इनके लाइसेंस का दोबारा रिन्यूवल नहीं होता है, तब तक इन्हें ऐफिडेविट करने का अधिकार नहीं है.
इसके मद्देनजर विधि विभाग ने यह निर्देश जारी किया है कि जिनका लाइसेंस समाप्त होता है, वे उस समय तक नोटरी के रूप में ऐफिडेविट का काम नहीं कर सकते. विधि विभाग के स्तर से लाइसेंस का रिन्यूवल होने के बाद ही नोटरी पब्लिक के तौर पर नामित कोई वकील ऐफिडेविट का काम दोबारा शुरू कर सकते हैं.
इस तरह की पकड़ी गयी खामी
नोटरी पब्लिक वकील के पास अगर कोई व्यक्ति ऐफिडेविट कराने आता है, तो संबंधित व्यक्ति का वैध पहचानपत्र व पूरा पता समेत तमाम जानकारी लेनी है.
जिन लोगों का ऐफिडेविट किया गया है, उनसे जुड़े पहचानपत्र या किसी वैध दस्तावेज की फोटो कॉपी अपने पास सुरक्षित रखनी है ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को खोजा जा सके. 90 फीसदी नोटरी इन नियमों का पालन नहीं करते हैं. इनके रजिस्टर में सीरियल नंबर को भी मेंटेन नहीं किया जाता है. राज्य में लाइसेंसधारी नोटरी पब्लिक की संख्या करीब एक हजार 200 है. ऐसे में कोई भी गलत व्यक्ति या फर्जी दस्तावेज से जुड़ा ऐफिडेविट करा सकता है. इस तरह के शपथपत्र का कोई मतलब ही नहीं है.
नियमानुसार काम नहीं करने वाले नोटरी को अंतिम चेतावनी दी गयी है. दोबारा ऐसी स्थिति पायी जाने पर संबंधित नोटरी का लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा. इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जायेगा.
-मदन किशोर कौशिक (सचिव, विधि विभाग)
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