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पटना : शराब के कारोबार में जब्त गाड़ियां बनीं समस्या

Updated at : 04 Nov 2019 8:44 AM (IST)
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पटना : शराब के कारोबार में जब्त गाड़ियां बनीं समस्या

राज्य में शराबबंदी होने के बाद माफियाओं पर कसी गयी है नकेल पटना : राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद इसकी तस्करी पर नकेल कसने के लिए भी पुलिस और उत्पाद महकमे की तरफ से व्यापक कार्रवाई की जा रही है. इस दौरान बड़ी संख्या में शराब के साथ अवैध व्यापार में उपयोग होने […]

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राज्य में शराबबंदी होने के बाद माफियाओं पर कसी गयी है नकेल
पटना : राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद इसकी तस्करी पर नकेल कसने के लिए भी पुलिस और उत्पाद महकमे की तरफ से व्यापक कार्रवाई की जा रही है. इस दौरान बड़ी संख्या में शराब के साथ अवैध व्यापार में उपयोग होने वाले वाहन भी बड़ी संख्या में जब्त हो रहे हैं.
शराब को नष्ट करने के प्रावधान की तरह ही इन वाहनों को भी जब्त कर इनकी नीलामी करने का नियम शराबबंदी कानून में है, परंतु जब्त होने वाले अधिकतर वाहनों की जांच में यह पता चला कि ये चोरी के हैं. यानी शराब के कारोबार में बड़ी संख्या में चोरी के वाहन का उपयोग होता है. कई बार चोरी के वाहनों का नंबर प्लेट बदल कर इनका उपयोग किया जाता है. चोरी के वाहनों का उपयोग शराब की तस्करी में होने के कारण इन वाहनों की नीलामी नहीं हो पा रही है. वाहन जब्त होने के बाद जांच में यह पता चलता है कि ये चोरी के हैं.
ऐसे में इन वाहनों को जब्त तो कर लिया जाता है, लेकिन इनकी नीलामी या नष्ट करने से संबंधित कोई प्रक्रिया नहीं हो पाती, क्योंकि असल में ये वाहन दूसरे के नाम पर होते हैं और इनकी चोरी से संबंधित एफआइआर दर्ज रहती है. दूसरी तरफ, शराब के कारोबार में जब्त होने की वजह से इन वाहनों को इसके असल मालिक को सौंप भी नहीं सकते हैं. ऐसे बड़ी संख्या में थानों में रखे ये वाहन कबाड़ बनते जा रहे हैं.
राज्य में शराबबंदी के मामले में अब तक करीब 10 हजार वाहन जब्त हो चुके हैं. इनमें उत्पाद विभाग ने करीब छह हजार वाहन जब्त किये हैं. जब्त किये हुए इन वाहनों में कुछ एक की ही अब तक नीलामी हो पायी है. इन वाहनों में करीब 60 फीसदी वाहन चोरी के ही हैं.
बड़ी मशक्कत के बाद सरकार ने जब्त हुई शराब को नष्ट करने से संबंधित नियम तैयार कर लिया है. इसके तहत देर से ही सही, लेकिन शराब को बड़े स्तर पर नष्ट किया जाता है, परंतु इसमें जब्त हुए चोरी के वाहनों से संबंधित कोई विशेष दिशा-निर्देश तैयार नहीं होने के कारण यह मामला फंसा हुआ है. फिलहाल सरकार इस मामले में उचित नियम बनाने के लिए न्यायालय से भी मार्ग- दर्शन लेने की पहल कर रही है.
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