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छठपूजा : दीघा, पाटीपुल, शिवा के गंगा घाट बेहतर, बांसघाट मार्ग में दलदल, कहीं धंस रहे पैर, तो कहीं है नाले की बदबू

Updated at : 02 Nov 2019 6:12 AM (IST)
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छठपूजा : दीघा, पाटीपुल, शिवा के गंगा घाट बेहतर, बांसघाट मार्ग में दलदल, कहीं धंस रहे पैर, तो कहीं है नाले की बदबू

सभी घाट नहीं हैं सुविधाजनक, पूरी तरह से नहीं हो सके तैयार पटना : लोक आस्था के पर्व छठपूजा के लिए गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ने वाली है. लेकिन पूजा के लिए जो घाट तैयार किये गये हैं, वह सभी घाट सुविधाजनक नहीं हैं. जैसे बांसघाट, पहलवान घाट, एलसीटी घाट का […]

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सभी घाट नहीं हैं सुविधाजनक, पूरी तरह से नहीं हो सके तैयार
पटना : लोक आस्था के पर्व छठपूजा के लिए गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ने वाली है. लेकिन पूजा के लिए जो घाट तैयार किये गये हैं, वह सभी घाट सुविधाजनक नहीं हैं. जैसे बांसघाट, पहलवान घाट, एलसीटी घाट का अस्थायी तालाब, कुर्जी बालू पर का अस्थायी तालाब अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है.
पहलवान घाट, एलसीटी घाट के पहले बने पोखरे का किनारा ठीक नहीं है. वहीं, बालू पर घाट के पोखरे में शुक्रवार को पानी भरा जा रहा था. हालांकि दीघा घाट, शिवा घाट, मिनार घाट, जेपी सेतु घाट बेहतर हैं, यहां पर पार्किंग की सुविधा भी है और घाट के किनारे काफी जगह है. इस बार छठ व्रतियों को थोड़ा सावधानी से घाटों पर जाना होगा. आइये आपको बताते हैं दीघा से बांसघाट की ग्राउंड रिपोर्ट.
पाटीपुल, दीघा घाट, शिवा घाट पर ठीक है व्यवस्था : छठपूजा के लिए तैयार किया गया तीन घाट काफी अच्छा है. तीनों घाटों पर जाने के लिए जो एप्रोच मार्ग है, वह भी ठीक है. घाट पर बड़े एरिया में पार्किंग है. जहां काफी संख्या में गाड़ियों की पार्किंग हो सकती है. घाट पर उतरने के लिए सीढ़ी बनाया गया है, घाट पर जहां अर्घ दिया जाना है वहां भी काफी जगह है. कहीं-कहीं फिसलन है लेकिन फिर भी अन्य घाटों की अपेक्षा ठीक है.
शुक्रवार को खरना के लिए बड़ी संख्या में लोग गंगा घाट पर पहुंचे थे. लोगों ने यहां पर दातून किया, नहाया और पूजा करने के बाद गंगा जल लेकर घर आये. इन घाटों पर भव्यता दिख रही है. यहां पर एलाउंसमेंट किया जा रहा था. कुछ लोग बैरिकेटिंग के पास अटखेलियां कर रहे थे, इस पर उन्हें रोका गया. दीघा गेट नंबर-88 का घाट भी काफी खूबसूरत है. इंट्री प्वाइंट थोड़ा संकरा है, लेकिन घाट काफी अच्छा है. यहां पर पार्किंग की अच्छी व्यवस्था है. घाट पर पहुंचे लोगों ने कहा कि वह लोग बांसघाट से आये हैं.
बांसघाट के एप्रोच मार्ग में दलदल
जिला प्रशासन के दावे भले ही कुछ भी हो पर बांसघाट की सूरत बहुत अच्छी नहीं है. एप्रोच मार्ग आधे से अधिक दूरी तक बेहद खराब है. कहीं बालू में पैर फंस रहा है तो कहीं दलदल मुसीबत बनी हुई है. खरना के दिन घाट पर जा रहे लोगों के वाहन रास्ते में फंसते दिखायी दिये. बालू की बोरियों जरूर रखी गयी हैं.
बुद्धा घाट का इंट्री प्वाइंट संकरा : बुद्धा घाट पर काफी भीड़ होती है. काफी लोग छठपूजा के लिए जाते हैं लेकिन इस घाट का इंट्री प्वाइंट ठीक नहीं है. बहुत ही सकरा है.
एप्रोच मार्ग पर भी बालू और दलदल है. बुद्धा घाट हालांकि इस बार खतरनाक घोषित किया गया है लेकिन घाट से पहले अस्थायी तालाब बनाया गया है. तालाब में महिलाओं का उतरना इतना आसान नहीं होगा.
जेपी सेतु घाट का रास्ता नहीं है ठीक : जेपी सेतु घाट पर जाने का रास्ता बहुत ठीक नहीं है. पार्किंग हैं यहां पर, घाट के किनारे जगह भी है. लेकिन घाट के किनारे फिसलन है. वहीं इस घाट का कुछ हिस्सा खतरनाक एरिया में है. लाल कपड़ा लगाकर बैरिकेडिंग किया गया है.
कहीं धंस रहे पैर, तो कहीं है नाले की बदबू
कलेक्ट्रेट और महेंद्रू घाट: कलेक्ट्रेट घाट पर सबसे ज्यादा लोग पूजा करने के लिए पहुंचेंगे. यहां जाने वाले रास्ते में अभी भी पैर धंस रहा है. महेंद्रू घाट के सामने वाले रास्ते में जियो बैग डाले गये हैं, लेकिन वह अपर्याप्त है. वहां गाड़ी भी धंस जा रही है और पूजा के लिए पानी लाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
काली घाट और कृष्णा घाट : काली घाट सबसे सुंदर घाटों में से एक है, लेकिन यहां की सबसे बड़ी परेशानी अंटा घाट के सीवरेज का पानी है. सीवरेज का पानी महेंद्रू घाट से लेकर अंटा घाट तक नाले की शक्ल ले चुका है. इस कारण अंटा घाट को खतरनाक बताते हुए रेड मार्क लगा दिया गया है. लेकिन यहां से आने वाली बदबू काली घाट तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशान कर रही है. यही हाल कृष्णा घाट का है. यहां तो सीधे सीवरेज का पानी गंगा में बहाया जा रहा है.
पटना कॉलेज घाट : पटना कॉलेज घाट पर जाने का रास्ता संकीर्ण है. यहां घुसने पर आपको गाड़ी की पार्किंग की जगह मैदान में दी जायेगी लेकिन जब आप पैदल वाणिज्य कॉलेज से आगेबढ़ेंगे तो घाट पर जाने का रास्तासंकरा है. यहीं से आने-जाने की जगह दोनों दी गयी है. घाट की तरफ सीढ़ी रहने के कारण सावधानी बरतने की दरकार है. बालू से बने घाट धंसने की शिकायत पर यहां जियो बैग डाला जा रहा है. यहां चेंजिंग रूम की कमी दिखायी दी.
गोलकपुर बालू घाट : गोलकपुर बालू घाट को बनाने का काम अभी तक नहीं पूरा हो सका है. इसे बनाने का काम लगातार किया जा रहा है. जब हम यहां दिन के तीन बजे पहुंचे तो उस समय भी मजदूर लगातार बालू की सीढ़ियां बनाने में जुटे थे.
लॉ कॉलेज घाट : यहां व्यवस्था सही है. घाट धंसे नहीं इसके लिए पहले हरे बांस की चचरी बनाकर डाली गयी है. इसके ऊपर जियो बैग भी डाला गया है. परमानेंट चेंजिंग रूम में सामान रहने के कारण बंद कर दिया गया है. इसके लिए विकल्प के तौर पर अस्थायी चेंजिंग रूम बनाया गया है. वहीं, एनआइटी घाट की व्यवस्था सबसे बेहतर दिखायी दे रही है.
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