48 निकायों में धीमा पड़ा कचरा प्रबंधन का काम
Updated at : 07 Oct 2019 2:34 AM (IST)
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पटना : बारिश का असर अगले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम पर भी पड़ सकता है क्योंकि सर्वेक्षण के लिए समय- सीमा के भीतर किये जाने वाले ठोस कचरा प्रबंधन के तहत कचरा से खाद बनाने का काम धीमा हो गया है. दरअसल बारिश के कारण राज्य के 48 निकायों में शुरू होने वाला प्रबंधन […]
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पटना : बारिश का असर अगले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम पर भी पड़ सकता है क्योंकि सर्वेक्षण के लिए समय- सीमा के भीतर किये जाने वाले ठोस कचरा प्रबंधन के तहत कचरा से खाद बनाने का काम धीमा हो गया है. दरअसल बारिश के कारण राज्य के 48 निकायों में शुरू होने वाला प्रबंधन अब तक शुरू नहीं हो पाया है.
इसके अलावा इन निकायों में गीला व सूखा कचरा अलग-अलग संग्रह करने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पायी है. दिसंबर तक सभी निकायों में कचरा प्रबंधन के सभी छह प्रावधानों को लागू करने में अधिक समय लगने की संभावना है. गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के तहत राज्य के सभी 142 शहरी निकायों को सर्वेक्षण में भाग लेना है.
जनवरी में सिटीजन फीडबैक के लिए शुरू होगा प्लेटफाॅर्म
स्वच्छता सर्वेक्षण में लगभग एक करोड़ लोगों के अपने शहर को लेकर सिटीजन फीडबैक की आवश्यकता होगी. सर्वेक्षण में सिटीजन फीडबैक के 1500 अंक निर्धारित किये गये हैं. सर्वेक्षण में पहली बार 2016 में जब एक लाख लोगों ने अपने फीडबैक दिये थे, तो मैसूर नंबर वन बना था.
इसके बाद 2017 में इंदौर को 18 लाख, फिर 2018 में इंदौर को 38 लाख और 2019 में तीसरी बार 64 लाख लोगों ने विभिन्न डिजिटल माध्यमों से अपने फीडबैक देकर इंदौर को नंबर वन बनाया था. उस हिसाब से इस बार लगभग एक करोड़ लोगों के फीडबैक किसी भी शहर की रैंकिंग बेहतर करने के लिए आवश्यक होंगे. इस बार जनवरी से प्रक्रिया शुरू होगी.
वर्गीकरण व प्रोसेंसिंग में परेशानी
सर्वेक्षण में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के तहत निर्धारित 1500 अंक में 700 अंक ठोस कचरा प्रबंधन का है. इसमें कचरा के प्रोसेसिंग व निष्पादन, स्थायी सफाई, कलेक्शन एंड ट्रांसपोटेशन व चार फीसदी अंक नये प्रयोग को लेकर दिये गये हैं.
इस बार भी राज्य के अधिकतर शहरों में कचरा प्रोसेसिंग व निष्पादन को लेकर मामला फंसेगा क्योंकि, राज्य के 142 निकायों के 95 फीसदी वार्डों में डोर- टू- डोर कचरा कलेक्शन का काम पूरा हो गया है, लेकिन कचरा को खपाने व निष्पादन को लेकर मात्र 48 निकायों में काम चल रहे थे. इसमें एक- दो को छोड़ कर कर किसी भी निकाय में निष्पादन की प्रक्रिया पूरे क्षेत्र के लिए नहीं है.
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