विश्वविद्यालयों के यूएमआइएस लागू करने के खर्चों में बड़ा अंतर
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : राज्य के विश्वविद्यालयों में यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (यूएमआइएस) को हर हाल में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है. यूजीसी से मान्यता और नैक मान्यता दोनों के लिए यह अनिवार्य शर्त है. आने-वाले समय में वैसे विवि जो यूएमआइएस के तहत नहीं आते उनके मान्यता पर ही संकट हो सकता है. यही […]
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पटना : राज्य के विश्वविद्यालयों में यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (यूएमआइएस) को हर हाल में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है. यूजीसी से मान्यता और नैक मान्यता दोनों के लिए यह अनिवार्य शर्त है. आने-वाले समय में वैसे विवि जो यूएमआइएस के तहत नहीं आते उनके मान्यता पर ही संकट हो सकता है.
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यही वजह है कि हर विवि यूएमआइएस को लागू करने के लिए अलग-अलग कंपनियों से करार कर रहा है. लेकिन दिक्कत यहां यह है कि हर कंपनी का अलग सॉफ्टवेयर है और उनका दर भी अलग-अलग है. लेकिन दिक्कत सिर्फ यही नहीं है बल्कि दिक्कत यह है कि इनके दर में बहुत बड़ा अंतर है.
बिहार विवि का बजट 60 रु प्रति छात्र, तो पीयू का 337 रु प्रति छात्र : बिहार विवि का बजट 60 रु प्रति छात्र है तो पीयू का 337 रु प्रति छात्र. बीएन मंडल विवि ने बजट 300 प्रति छात्र का दिया है, तो तिलका मांझी विवि ने मात्र 89.68 रुपये का बजट दिया है.
इसी तरह पीपीयू का प्रति छात्र रेट 75 रु, पूर्णिया विवि का 90 रु , मुंगेर विवि का 170 रु, ललित नारायण मिथिला विवि का 170, जेपीयू का 187, वीकेएसयू ने 128 रु प्रति छात्र का दर दिया है. वहीं, केएसडीएसयू ने 13.24 लाख प्रति वर्ष रेट दिया. इसका संचालन एआइसी करेगी. बाकी ज्यादातर विवि निजी एजेंसी से करार कर रहे हैं या कर चुके हैं.
दर में विविधता की वजह से राजभवन भी परेशान है और वह एक जैसा सॉफ्टवेयर प्रयोग कर दर में समानता लाने को लेकर विवि को कह रहा है. लेकिन विवि अपने तर्क दे रहे हैं. दूसरी तरफ इन सब वजह से यूएमआइएस में देरी हो रही है.
सॉफ्टवेयर का प्रयोग हो
हमारे यहां छात्रों की संख्या कम है. अगर समेकित गणना करेंगे तो यह दर कम ही है. जैसे पीयू के पास 40 हजार छात्र हैं तो दूसरे विवि के पास पांच लाख छात्र हैं.
इस वजह से दर में अंतर है. हमारी स्थिति तो यह है कि कम छात्र होने की वजह से उस दर में जो प्रति छात्र सबसे अधिक है, उसमें भी सिर्फ एक ही वेंडर तैयार हुआ है. इसमें अगर किसी एक ही सरकारी एजेंसी को सभी विवि में यूएमआइएस का भार दे दिया जाये तो यह ज्यादा अच्छा होगा. हमलोग भी चाहते हैं कि यूनिफॉर्म सॉफ्टवेयर का प्रयोग हो ताकि काम गुणवत्ता पूर्ण हो, एक जैसा हो और पारदर्शी हो.
मनोज मिश्र, रजिस्ट्रार, पीयू
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