बोरिंग से आ रहा गंदा बदबूदार पानी, पेयजल बना बड़ी समस्या
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Oct 2019 5:54 AM (IST)
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पटना : 200 मीटर की दूरी पार कराने के लिए रिक्शावाला 200 रुपये मांगता था. मरीजों के लिए आनाजाना संभव नहीं रहा. जो पहले से भर्ती थे, उनके इलाज में भी बाधा आने लगी. क्लिनिक बंद करना पड़ा और पिछले आठ-नौ दिनों में बहुत कुछ ऐसा हुआ जो कई दशकों से पटना में रहने के […]
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पटना : 200 मीटर की दूरी पार कराने के लिए रिक्शावाला 200 रुपये मांगता था. मरीजों के लिए आनाजाना संभव नहीं रहा. जो पहले से भर्ती थे, उनके इलाज में भी बाधा आने लगी. क्लिनिक बंद करना पड़ा और पिछले आठ-नौ दिनों में बहुत कुछ ऐसा हुआ जो कई दशकों से पटना में रहने के बावजूद भी मैंने आज तक नहीं देखा था. अब पानी का लेवल चार-पांच फीट से घट कर डेढ़ फीट पर पहुंचा है, लेकिन अभी भी समस्या खत्म नहीं हुई है. डॉ एनपी नारायण ने इस प्रकार अपनी पीड़ा बतायी.
पानी सड़ कर काला पड़ चुका है. मच्छर और कीट पतंगे बढ़ गये हैं. इसके कारण मलेरिया, टायफायड जैसे मामलों के बढ़ने की आशंका है. डेंगू के 20 से अधिक मरीज मेरी ही क्लिनिक में अब तक आ चुके हैं. सबसे बड़ी समस्या पेय जल की है. सबमरसेबल पंप के पानी में भी अब दुर्गंध आने लगी है, जो इस बात का प्रमाण है कि ऊपर जमा गंदला पानी रिस कर अब भूमिगत स्तर तक भी पहुंचने लगा है और पानी को भी विषाक्त करने लगा है.
इसी के साथ हेपटाइटिस, टाइफाइड और कॉलेरा के जर्म के भी नीचे तक पहुंचने की अाशंका है जो पेयजल के माध्यम से हमें संक्रमित कर सकता है. ऐसे में जलजमाव वाले क्षेत्रों में अभी पानी उबाल कर पीना ही बेहतर बचाव है. पानी निकलने वाले जगहों पर सफाई के साथ चूना और ब्लिचिंग का छिड़काव भी बेहद जरूरी है, नहीं तो महामारी फैलने की आशंका बनी रहेगी.
जलजमाव वाले इलाके में उत्साह फीका
राजधानी पटना में दुर्गापूजा का महोत्सव देखने के लिए लोग बाहर से भी आते रहे हैं. इसके लिए पूरी तैयारी के साथ तरह-तरह के आकारों में पंडालों को सजाने का काम होता रहा है. इस बार बारिश के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में हुए जलजमाव ने पूजा समिति के सदस्यों का उत्साह फीका कर दिया है. पूजा समितियों द्वारा अंतिम समय में जोर-शोर से तैयार करने का काम हुआ है. जिस इलाके में पानी की निकासी हो चुकी है, वहां पूजा समिति के सदस्य काम में लगे हैं.
योगीपुर कंकड़बाग में न्यू मगध क्लब द्वारा 40 साल से दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है. मां दुर्गा की प्रतिमा स्थल वाले जगह में लगभग चार फुट पानी होने से पास के मंदिर में कलश स्थापित किया गया. पहली बार ऐसी स्थिति हुई कि कलश स्थापित करने का काम मंदिर में हुआ. क्लब के अध्यक्ष लाल बाबू यादव, राजू कुमार ने बताया कि दो दिन पहले पानी कम होने के बाद पंडाल सजाने की तैयारी हुई. प्रतिमा बनाने का काम दूसरी जगह हुआ.
हनुमाननगर (गांव) नवयुवक संघ द्वारा 30 साल से मनाये जानेवाले दुर्गापूजा में पहली बार जलजमाव को लेकर पहली बार टेबुल पर कलश स्थापित किया गया है. संघ के मितरंजन व अंकित ने बताया कि जल जमाव की स्थिति देख कर भरोसा छोड़ दिये थे. लगभग चार फुट पानी ऊपर जमा था. पंडाल भी तैयार नहीं हुआ था. दो दिन पहले पानी निकलने पर दिन-रात कारीगर काम कर पंडाल जैसे-तैसे तैयार किया है.
राजेंद्र नगर मैला टंकी के पास श्री श्री दुर्गापूजा नवयुवक संघ द्वारा पूजा की तैयारी को लेकर पंडाल बनाने का काम शुरू हुआ था. नवरात्रा शुरू होने से दो दिन पहले बारिश के बाद हुए जल जमाव ने सारी तैयारी पर पानी फेर दिया. अब तक राजेंद्र नगर से पानी निकासी नहीं होने से पंडाल आधा-अधूरा है. प्रतिमा स्थापित होने पर भी श्रद्धालुओं का वहां पहुंचना मुश्किल है. दो फुट से ऊपर पानी है. सदस्यों ने बताया कि जलजमाव ने उत्साह फीका कर दिया.
श्रीदेवी स्थान भिखना पहाड़ी में सालों से हो रहे पूजा महोत्सव में इस बार पहले की तरह भव्यता में अंतर दिख रहा है. यह जल जमाव के कारण हुआ है. तीन दिन पहले इस इलाके में पानी की निकासी हुई. इसके बाद पंडाल को भव्य व आकर्षक बनाने का काम शुरू हुआ. अब श्री श्री दुर्गापूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि जल जमाव ने सब काम बिगाड़ दिया. अब पूजा संपन्न कराने पर ध्यान हैै.
दपुर स्थित श्रीमहादेव स्थान में शाम तक पंडाल तैयार करने का काम हो रहा था. मनोज कुमार ने बताया कि कम से कम उनके बैठने, प्रतिमा की निगरानी के लिए पंडाल आवश्यक है. पहले भव्य व आकर्षक पंडाल बनता रहा है. पानी जमा होने के कारण दो दिन पहले से कारीगर काम शुरू किया है.
कंकड़बाग के संजय
गांधी नगर नवनीत कॉलोनी में पानी जमा है. जहां पानी निकला है. वहां कीचड़ जमा है. इस वजह से कोई पंडाल का निर्माण नहीं हुआ है. पास में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित हुई है. कीचड़ व पानी से होकर ही दर्शन करने के लिए जाना पड़ेगा. मंजू देवी ने बताया कि पर्व त्योहार में स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखा जाता है.
संजय गांधी नगर के
काली मंदिर के समीप रहनेवाले अभिनव कुमार ने बताया कि अभी भी लगभग डेढ़ फुट पानी जमा है. माता का दर्शन करने के लिए पानी से होकर ही जाना पड़ेगा. सप्तमी को
माता का पट खुलने के बाद दर्शन का प्रावधान है, लेकिन पानी के कारण अष्ठमी तिथि को जायेंगे. शायद पानी कुछ कम हो जाये.
आर्य कुमार रोड नंबर
दो में रहनेवाले उदय कुमार ने बताया कि पानी जमा होने के कारण इस बार घुमना असंभव है. गली में पानी जमा होने से परिवार के अन्य सदस्यों का निकलना मुश्किल है.
पानी निकासी के लिए प्रयास हो रहा है. फिर भी पानी जस का तस जमा है. सैदपुर से दिनकर गोलंबर वाले रास्ते में पानी जमा है.
टाइल्स के कारोबारी विष्णु कुमार ने बताया कि आर्य कुमार रोड में अब तक पानी जमा होना आश्चर्य है. पिछले आठ दिनों से घर में कैद रहना पड़ा है. परिवार के कुछ सदस्य बड़ी मुश्किल से निकल कर रिश्तेदार के यहां चले गये हैं. जलजमाव के कारण इस इलाके में घुमना कठिन होगा. सैदपुर स्टेडियम के सामने की सड़क पर पानी काफी जमा है.
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